शिमला। प्रदेश हाईकोर्ट ने चरस रखने के आरोपी कुल्लू के निरमंड तहसील के अंतर्गत आने वाले गाँव कटमोर निवासी प्रदीप सिंह उर्फ रॉकी को दोषमुक्त ठहराते हुए उसे सुनाई दस साल कठोर कारावास व एक लाख रुपये जुर्माने की सजा को खारिज कर दिया। न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी व न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ ने विशेष न्यायाधीश किन्नौर स्थित रामपुर बुशहर के 28 जून 2016 के फैसले को पलटते हुए आरोपी को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए।
मामले के अनुसार 12 मार्च 2014 को स्टेट सीआईडी सब यूनिट रामपुर के इंचार्ज एएसआई पदम सिंह की अगुवाई में पशाडा खड़ के पास लिंक रोड कट मोड़ पर जब शाम सवा 7 बजे पुलिस पार्टी मौजूद थी तो उन्होंने आरोपी को कट मोड़ से मुख्य सड़क की तरफ से आते हुए देखा। आरोपों के अनुसार पुलिस को देखते ही वह घबरा गया व वहाँ से भागने की कोशिश की परंतु पुलिस ने उसे पकड़ लिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार संदेह के आधार पर तलाशी के दौरान आरोपी से 1 किलो 400 ग्राम बरामद हुई। 8 गवाहों को कोर्ट मे पेश करने के बाद अभियोजन पक्ष निचली अदालत में आरोपी को दोषी ठहराने में कामयाब हो गया। आरोपी प्रदीप ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में अपील के माध्यम से चुनौती दी थी जिसे स्वीकारते हुए हाईकोर्ट ने उसे बरी करने का फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त ठहराते हुए पाया कि अभियोजन पक्ष स्पष्ट नहीं कर पाया कि आरोपी की तलाश स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी में क्यों नहीं की गई। जबकि आरोपी यह साबित करने में सफल रहा कि जिस जगह उसे चरस रखने के आरोप में पकड़े जाने की बात कही गयी थी वहां आसपास काफी रिहाइश है और वहाँ से स्वतंत्र गवाह बुलाये जा सकते थे। कोर्ट के अनुसार अभियोजन पक्ष ऐसे मामलों में तलाशी के जरूरी प्रावधानों की अनुपालना को भी साबित नहीं कर सका। कोर्ट ने कहा कि जब आरोपी की तलाशी पुलिसकर्मियों ने ली तो उसे किसी मैजिस्ट्रेट अथवा राजपत्रित अधिकारी के समक्ष अपनी तलाशी देने का विकल्प न देकर उसे पुलिस के सामने तलाशी देने का विकल्प ही क्यों दिया गया। कोर्ट ने जांच में खामियां पाते हुए आरोपी को दोषमुक्त ठहराया और उसे तुरंत रिहा करने के आदेश दिए।