हाईकोर्ट ने मोटर वाहन दुर्घटना की एक अपील का निपटारा करते हुए दुर्घटना में मारे गए अजय कुमार सूद के आश्रितों को एक करोड़ 40 लाख 40 हजार रुपये साढ़े सात फीसदी ब्याज सहित देने के आदेश दिए। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर ने यह आदेश दिए।
कोर्ट ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को इस राशि का भुगतान करने के आदेश दिए हैं। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) शिमला ने 3 अक्तूबर 2008 को आदेश पारित कर मुआवजा राशि एक करोड़ 21 लाख नौ फीसदी ब्याज सहित आंकी थी। दुर्घटना में मारे गए अजय कुमार सूद की पत्नी रमा सूद और अन्य आश्रितों ने मुआवजा राशि को कम आंकते हुए हाईकोर्ट के समक्ष अपील की थी।
कोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के मुआवजा आदेशों में संशोधन करते हुए यह आदेश पारित किए। मामले के अनुसार 10 अक्तूबर 2003 को अजय कुमार सूद अपनी कार में ऋषिकेश जा रहे थे। एक ट्रक ने सहारनपुर में उनकी कार को टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। मृतक के आश्रितों ने शिमला के मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) में मुआवजे को दावा किया।
प्रार्थियों ने बताया कि मृतक ए क्लास कांट्रेक्टर होने के साथ इंजीनियर भी था। दुर्घटना के समय उसकी आयु 44 साल थी। वह हर माह पांच लाख कमाता था। प्रार्थियों ने 12 करोड़ के दावे को साबित करने के लिए 12 गवाह पेश किए। कोर्ट ने मामले का रिकॉर्ड देखने पर पाया कि मृतक संभवतया अपने आश्रितों पर सालाना दस लाख रुपये खर्च करता होगा। ऐसे में परिवार को भविष्य में कुल मिलाकर एक करोड़ 40 लाख रुपये का आर्थिक लाख खोना पड़ा।