तलाशी प्रक्रिया में खामियों के चलते आरोपी दोषमुक्त करार संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला अदालत ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज एक मुकदमे में आरोप साबित न होने पर दयाल चंद निवासी दरभोग (शिमला ग्रामीण) को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी से चरस बरामद की थी। पुलिस ने आरोपी से एक किलोग्राम से अधिक चरस बरामद करने का मामला दर्ज किया था।
यह मामला 12 दिसंबर 2024 को ढली थाना क्षेत्र में पंजीकृत हुआ था। पुलिस की टीम कुफरी और शिलोनबाग क्षेत्र में गश्त पर थी। आरोप लगे थे कि पुलिस टीम ने दरभोग के पास कियार नाला में तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से 1.010 किलोग्राम चरस बरामद की गई थी। इसके बाद पुलिस ने एनडीपीएस की धारा 20 के तहत एफआईआर दर्ज की थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुलिस कर्मियों सहित 16 गवाहों के बयान दर्ज किए गए लेकिन पर्याप्त सबूत न होने के कारण विशेष न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं होने पर दंडनीय कथित अपराध के आरोप से दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि जब तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया में खामियां थीं जिन पर विश्वास नहीं किया जा सकता। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने कहा कि जब तलाशी प्रक्रिया संदेहास्पद हो तो एसएफएसएल रिपोर्ट जैसे अन्य साक्ष्य आरोपी को प्रतिबंधित पदार्थ से जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष अपने आरोप संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। परिणामस्वरूप अदालत ने दयाल चंद को दोषमुक्त करार दिया।