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हिमाचल में बिगड़ सकते हैं समीकरण

Fri, 16 May 2014 08:20 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, शिमला
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इंतजार की घडि़यां खत्म। दो महीने तक चुनाव प्रचार में पसीना बहाने का फल सामने आने वाला है। कौन जीतेगा बाजी और कौन होगा क्लीन बोल्ड इसका पता अब से चंद घंटे बाद चल जाएगा। आठ बजे से मतगणना शुरू हो गई है और 12 बजे तक ईवीएम में बंद नेताओं की किस्मत का पिटारा खुलेगा।
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हमीरपुर में भाजपा प्रत्याशी अनुराग ठाकुर ‘हैट्रिक’ लगा पाएंगे या कांग्रेस के राजेंद्र राणा केंद्रीय राजनीति में अपना ‘खाता’ खोलेंगे। हैरानी की बात यह है कि सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य इस बार प्रचार के लिए यहीं डेरा डाले हुए हैं। राजेंद्र राणा सुजानपुर से विधायक हैं और वीरभद्र ने उनसे इस्तीफा लेकर सांसद के लिए चुनाव लड़ने को कहा था।

सुजानपुर उपचुनाव में राजेंद्र राणा की पत्नी अनिता राणा की किस्मत का फैसला भी आज ही होगा। 7 मई को ही सुजानपुर सीट के लिए उपचुनाव हुआ था।

भाजपा का गढ़ रहा है हमीरपुर

2009 के लोकसभा चुनावों को लें तो अनुराग ने यहां से लगभग 7800 मतों से बढ़त ली थी। वैसे भी हमीरपुर भाजपा का गढ़ रहा है। इनसे पहले अनुराग के पिता प्रेम कुमार धूमल और सुरेश चंदेल यहां से चुनाव जीत चुके हैं।

लेकिन, इस बार मुकाबला कड़ा है। कांग्रेस के राजेंद्र राणा के साथ ‘सत्ता’ है तो आम आदमी पार्टी की कमल कांता बतरा की परफॉरमेंस भी चुनावी समीकरण बिगाड़ सकती है।

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि परिणाम चाहे जो भी रहे, लेकिन इस सीट पर कांटे का मुकाबला है।

मंडी सीट पर कितनी सेफ रहेगी कांग्रेस

मंडी सीट पर भी इस बार कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। भले ही कांग्रेस इस सीट को सेफ जोन मान रही हो लेकिन मोदी लहर को भी नकारा नहीं जा सकता।

यहां से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्‍नी प्रतिभा सिंह मैदान में हैं। प्रतिभा सिंह इससे पहले भी यहां हुए उपचुनाव में रिकॉर्ड मतों से जीती थी।

उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और इस बार भी प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार है।

वोट बैंक में सेंध लगा सकती है सीपीआईएम

मंडी सीट पर सीपीआई एम प्रत्याशी कुशाल भारद्वाज भी कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। हालांकि कांग्रेस का भी यहां काफी दबदबा रहा है।  मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह इसी सीट से तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं। साथ ही केंद्र में मंत्री भी रहे हैं।

रामस्वरूप की प्राथमिकताओं में पांच प्रमुख मुद्दे
-प्रदेश में रेल लाइन का विस्तार करना।
-मंडी संसदीय क्षेत्र में पर्यटन विकास को बढ़ावा देना।
-प्रदेश में फल व कृषि पर आधारित उद्योग स्थापित करना।
-गुम्मा नमक कारखाने को दोबारा चालू करना।
-पावर प्रोजेक्टों में प्रदेश की हिस्सेदारी को दिलाना।

शिमला सीट पर हमेशा रहा है कांटे का मुकाबला

इस सीट का इतिहास काफी रोचक है। वर्तमान में यहां से भाजपा के वीरेंद्र कश्यप सांसद है जो कुल दस चुनाव (लोस+विस) हार चुके हैं। पिछला मुकाबला भी आसान नहीं रहा था और उन्हें कांग्रेस के धनी राम शांडिल से कड़ी टक्‍कर मिली थी।

यहां से आप प्रत्याशी सुभाष चंद्र और सीपीआई एम के जगत राम कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह दोनों प्रत्याशी शिमला से ही संबंध रखते हैं। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी मोहन लाल ब्राक्‍टा भी लीड लेने के लिए शिमला पर ही निर्भर हैं।

इतिहास पर नजर डालें तो इस सीट से कांग्रेस के केडी सुल्तानपुरी छह बार फतह हासिल कर चुके हैं। इसके अलावा यह भी एक सच्‍चाई है शिमला की जनता वीरभद्र के नाम पर वोट देती है।

कांगड़ा में शांता या चंद्र कुमार

कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से भाजपा के शांता कुमार मैदान में हैं। मुख्‍यमंत्री भी रह चुके हैं। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। इसे देखते हुए पार्टी में उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर है। नरेंद्र मोदी इन्हें अपना राजनीतिक गुरू मानते हैं।

यहां से वर्तमान में राजन सुशांत सांसद हैं जो भाजपा से बागी होकर आप में शामिल हो गए हैं। कांग्रेस से चंद्र कुमार मैदान में हैं जो इस सीट से पूर्व सांसद रह चुके हैं। शांता दो बार केंद्र में मंत्री भी रहे हैं। लेकिन समीकरण बिगाड़ने के लिए कांग्रेस भारी पड़ सकती है। कांगड़ा में दस विस सीटों पर कांग्रेस काबिज है।

राजन सुशांत भी भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। अगर शांता जीतते हैं तो उन्हें केंद्र में मंत्री पद मिल सकता है।
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किसका क्या है दांव पर?

-पत्नी प्रतिभा की जीत या हार से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सीधी प्रतिष्ठा जुड़ी हैं। मोदी की इस सुनामी में प्रतिभा जीतीं तो वीरभद्र का कद बढ़ेगा, हारी तो पार्टी के भीतर ही मुख्यमंत्री के विरोधियों को हमले का नया मौका मिलेगा।

-राजेंद्र राणा पर वीरभद्र ने दांव खेला है। मुख्यमंत्री ने अपना ज्यादा वक्त हमीरपुर में दिया। अपने बेटे की ड्यूटी वहीं लगा दी। ऐेसे में राणा हारे तो वीरभद्र के लिए बड़ी असहज स्थिति हो जाएगी। राणा जीते तो वीरभद्र की प्रतिष्ठा में चार चांद लगेंगे।

-धूमल के बेटे अनुराग मोदी की इस कथित लहर में हार गए तो धूमल के लिए बड़ा झटका होगा। बाकी तीन सीट जीत कर भी पूर्व सीएम धूमल इस हार की भरपाई नहीं कर पाएंगे। अनुराग जीते पुरस्कार पाएंगे।

- भाजपा के कद्दवर नेता राजनीतिक संन्यास के बावजूद मैदान में हैं। शांता कुमार की जीवन भर की प्रतिष्ठा इस चुनाव से जुड़ी है। हारे तो राजनीति से हमेशा के लिए बाहर होंगे। जीते तो केंद्र के लिए रास्ते खुल सकते हैं।
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