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Shimla News: शराब के धंधे में उतरे निगम, बोर्ड एक महीने में हुए करोड़ों के कर्जदार

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नगर निगम, हिमफेड, एचपीएमसी और फॉरेस्ट पर एक महीने की 6.60 करोड़ की रिकवरी
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आबकारी विभाग ने नोटिस देकर शुरू की कार्रवाई, एमसी, एचपीएमसी और फॉरेस्ट ने नहीं दी लाइसेंस फीस, लाइसेंस फीस सहित ब्याज की राशि बकाया
आबकारी विभाग ने वर्ष 2024-25 में 218 करोड़ में नीलाम किए थे 183 ठेके, शेष बचे 73 ठेकों का संचालन जिम्मा बोर्ड और निगम के पास
दीपक मेहता
शिमला। प्रदेश सरकार के आदेश पर पहली बार शराब के धंधे में उतारे गए निगम और बोर्ड पहले महीने में ही करोड़ों के कर्जदार हो गए। जिले में शराब के धंधे में नगर निगम शिमला, एचपीएमसी, हिमफेड और वन निगम बुरी तरह से पिट गए हैं।
कर एवं आबकारी विभाग के पास इन बोर्ड और निगमों की 30 दिन में करीब 6.60 करोड़ की देनदारियों हो गई हैं। यह सिर्फ अप्रैल की लाइसेंस फीस है, जोकि नियमों के मुताबिक बोर्ड और निगम की ओर से जमा नहीं करवाई गई है। हालांकि, हिमफेड ही 1.14 करोड़ में से 87 लाख रुपये की लाइसेंस फीस जमा करवा पाया है। नगर निगम, एचपीएमसी और वन निगम ने लाइसेंस फीस के तौर पर कुछ भी जमा नहीं किया है। अब आबकारी विभाग ने नगर निगम, हिमफेड, एचपीएमसी और फॉरेस्ट को लाइसेंस फीस नहीं देने पर रिकवरी प्रक्रिया शुरू कर दी। इन्हें नोटिस जारी किए गए हैं।
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कर एवं आबकारी विभाग ने इस वर्ष 252 करोड़ में 256 ठेकों को नीलाम करने का लक्ष्य रखा था। नीलामी प्रक्रिया में ठेकेदारों ने 183 ठेकों को करीब 218 करोड़ में खरीदा था। शेष बचे 73 ठेकों के लिए कोई भी खरीदार नहीं मिला। एक महीने तक चली नीलामी में कारोबारियों ने इन ठेकों के लिए निर्धारित दाम (रिजर्व प्राइस) से कम बोली लगाई। इसके कारण यह ठेके नीलाम नहीं हुए। इस बीच सरकार ने इन ठेकों के संचालन की जिम्मेदारी शहरी क्षेत्र में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्रों में एचपीएमसी, हिमफेड और वन निगम को सौंपी। साथ ही हिमफेड को होलसेल में शराब बेचने का लाइसेंस जारी किया ताकि बोर्ड और निगमों को बेचने के लिए आसानी से शराब उपलब्ध हो सके। आबकारी नीति के अनुसार बोर्ड और निगमों को एक साल के लिए 73 ठेकों का संचालन दिया है। लेकिन शराब की बिक्री के लिए विभाग के साथ किए अनुबंध की शर्तों के अनुसार अप्रैल की लाइसेंस फीस की राशि नहीं भर रहे है।
कर एवं आबकारी विभाग के उपायुक्त प्रदीप कुमार ने बताया कि एचपीएमसी, नगर निगम, हिमफेड और वन निगम को वसूली राशि जमा करवाने के लिए नोटिस जारी किए हैं। समय पर देनदारियां न चुकाने पर लाइसेंस फीस सहित ब्याज के रूप में बकाया राशि चुकानी होगी। संवाद
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एमसी शिमला से वसूलने हैं 2.38 करोड़
नगर निगम शिमला से अप्रैल महीने में 2.38 करोड़ की लाइसेंस फीस वसूली जानी है। इसके साथ ही फॉरेस्ट से 2.5 करोड़, एचपीएमसी से 1.18 करोड़ और हिमफैड से 31 लाख की राशि वसूली जानी है।
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