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हिमाचल के छह जिलों में निजी ऑपरेटरों ने बसें चलाने से किया इंकार

Sat, 06 Jun 2020 06:59 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला/कुल्लू
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कुल्लू में खड़ी हुईं निजी बसें - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल में निजी बस संचालक बसें बंद करने की तैयारी में हैं। प्रदेश के छह जिलों में निजी बस संचालकों ने डीजल का खर्चा भी न निकलने पर बसें खड़ी कर दी हैं। चंबा, सोलन, मंडी व हमीरपुर में पहले ही निजी बसें नहीं चल रही थीं। वहीं, शनिवार को कुल्लू में भी ऑपरेटरों ने बसें खड़ी कर दी हैं। शिमला में सोमवार से निजी बसें नहीं चलाने का संघ ने फैसला लिया है। वहीं, प्रदेश के अन्य जिलों के बस संचालकों को एक सप्ताह बाद होने वाली समीक्षा बैठक का इंतजार है। जिसमें बसों के घाटे की समीक्षा की जाएगी। प्रदेश निजी बस ऑपरेटर्स संघ के महासचिव रमेश कमल ने बताया कि परिवहन मंत्री ने बस ऑपेरटरों को आश्वासन दिया था कि वे बसें चलाएं और एक सप्ताह बाद समीक्षा बैठक होगी। इसमें बसों के घाटे का आकलन किया जाएगा। घाटे की स्थिति में सरकार बस ऑपरेटरों की मदद करेगी। अब बसों को चलते एक सप्ताह होने जा रहा है और निजी संचालक घाटे की ओर जा रहे हैं। अब संचालक समीक्षा बैठक के इंतजार में हैं, जिसमें परिवहन आयुक्त को घाटे के बारे में जानकारी दी जाएगी। 

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जिला कुल्लू में ट्रायल पर चल रही निजी बसों को बस ऑपरेटर संघ ने पांच दिन बाद बंद कर दिया है। सवारियां नहीं मिलने और सरकार की ओर से मांगों को पूरा न करने पर निजी बस संघ ने यह निर्णय लिया है। लॉकडाउन में जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के करीब 60 रूटों पर 80 बसों को चलाया था। संघ ने सरकार से न्यूनतम किराये में 20 रुपये बढ़ोतरी करने, अन्य किराये में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी, चालकों-परिचालकों की सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाने, बसों का टोकन टैक्स 31 मार्च 2021 तक माफ करने तथा बस ऑपरेटरों को बैंक के माध्यम से आर्थिक पैकेज मुहैया करवाने की मांग की है।उधर, संघ के जिला अध्यक्ष रजत जंबाल ने कहा कि लॉकडाउन के समय सरकार के आदेश हुए तो निजी बसों के चालक-परिचालक जान की परवाह किए बिना विभिन्न प्रदेशों में प्रवासी मजदूरों को छोड़ने गए। वर्तमान में संघ ने फिर बसों का संचालन आरंभ किया। लेकिन 60 प्रतिशत की शर्त व पुराने किराये पर बसों का संचालन करना मुमकिन नहीं है। कहा कि जब तक प्रदेश सरकार संघ की मांगों को पूरा नहीं करती। तब तक जिला में निजी बसों का संचालन पूर्ण रूप से बंद रहेगा। 
 

शिमला में भी प्राइवेट बस ऑपरेटर नहीं चलाएंगे बसें 

प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष कमल ठाकुर और महासचिव सुनील चौहान ने कहा कि सोमवार से बसें नहीं चलाएंगे। कहा कि 60 फीसदी सवारियों की शर्त के साथ बसें चलाना मुश्किल हो गया है। इससे उन्हें भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। सरकार को डीजल पर सब्सिडी देनी चाहिए।

बसें चलाने से डीजल का खर्चा भी नहीं निकल रहा 
वहीं, परिवहन निगम बीते दिनों से बसें चला है। हालात यह है कि इन बसों से डीजल का खर्च भी नहीं निकल रहा है। बसें खाली दौड़ रही हैं। सरकार को मिली रिपोर्ट के मुताबिक बसों में अभी पांच तो कभी सात सवारियां बैठ रही हैं। 

सिरमौर में घटाईं निजी बसें
सिरमौर जिले में निजी बसों का संचालन घट गया है। कई ग्रामीण रूटों पर निजी बसें नहीं चल रहीं। हालांकि, फिलहाल बसों का संचालन जारी है। निजी बस ऑपरेटर संघ के प्रधान मामराज ने बताया कि कुछ रूटों पर बसें चल रही हैं लेकिन, सवारियां की संख्या नाममात्र है। कोरोना के भय से लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे।
 
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रूट क्लब करने की तैयारी 

प्रदेश सरकार रूट क्लब करने की तैयारी में है। इसका कारण लोगों का बसों में सफर करना न बताया जा रहा है। अभी प्रदेश में 2300 रूटों पर बसें चलाई जा रही हैं। वहीं,  सोलन में पहली जून से शुरू एचआरटीसी की बसें सवारियां न मिलने से बंद करनी पड़ी हैं। शनिवार को एचआरटीसी को अपनी 10 रूट बंद करने पड़े।

इनमें सोलन-ज्वालाजी बस भी शामिल है। वहीं, आगे भी अगर लोगों ने कोरोना के डर के चलते बसों में सफर करने में रुचि नहीं दिखाई तो कई अन्य रूट भी बंद हो सकते हैं। जिले में निजी संचालकों ने पहले ही बसें चलाने से इंकार कर दिया है।  
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