एसडीएम शिमला शहरी रहीं अधिकारी नीरज चांदला
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हिमाचल में कोरोना की दस्तक को पूरा एक साल हो गया है। लॉकडाउन में लोगों का साहस, धैर्य और कोरोना वॉरियर्स का सेवा भाव देखा। कोरोना काल में एसडीएम शिमला शहरी रहीं अधिकारी नीरज चांदला ने सबके लिए मिसाल कायम की। आईजीएमसी में सरकाघाट के एक युवक की कोरोना से मौत हो गई। शिमला में कोरोना से यह पहली मौत थी। मौत के बाद शव का अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं था। इस सबके बीच इंसानियत और हिम्मत की मिसाल पेश करते हुए तत्कालीन एसडीएम चांदला आधी रात को कनलोग शमशान घाट पहुंचीं और शव का दाह संस्कार करवाया। लॉकडाउन में खुद सैकड़ों गरीब परिवारों को राशन उपलब्ध करवाया। इस काम के लिए महिला अधिकारी को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड लंदन की ओर से स्टार अवार्ड दिया गया था। राज्यपाल से लेकर मंत्री तक ने उन्हें सम्मानित किया।
रामचंद्र 7 किमी दूर से पैदल चलकर आते थे सफाई करने
बीते साल लॉकडाउन में सैहब सोसायटी के कर्मचारियों ने कोरोना के खतरे के बावजूद नियमित सेवाएं दीं। कई कर्मचारी पांच से सात किलोमीटर पैदल चलकर शहर में सफाई करने पहुंचते थे। निगम ने कुछ कर्मचारियों की टीम ऐसी तैयार की, जिसे कोरोना पीड़ितों और क्वारंटीन किए गए लोगों के घरों से भी कूड़ा उठाना था। इन्हें संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा था। न्यू शिमला में तैनात सैहबकर्मी रामचंद्र भी इसी टीम का हिस्सा थे। रामचंद्र बताते हैं कि इस दौरान कई दिन उन्हें परिवार और बच्चों से दूर रहना पड़ा, लेकिन उनके इलाके में जो भी केस आए, उन्हें सामान पहुंचाने के साथ साथ उनके घरों से कूड़ा भी उठाया। रामचंद्र को बेहतरीन सेवाओं के लिए अक्तूबर 2019 में सीएम जयराम ठाकुर ने भी सम्मानित किया था।