प्रदेश सरकार भी बंदिशें बढ़ाने की तैयारी में है। ऐसे में इस बार भी समर सीजन के दौरान प्रदेश में कम सैलानियों के आने के आसार हैं। इससे होटल कारोबारियों, टैक्सी चालकों सहित दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।
हिमाचल प्रदेश में लगातार दूसरे साल समर पर्यटन सीजन पिटने की आशंका है। वर्ष 2020 में लॉकडाउन लगने के चलते समर सीजन शून्य रहा था। कोरोना संक्रमण के मामलों के चलते विंटर सीजन भी प्रदेश में कमजोर रहा था। 15 अप्रैल से हिमाचल में समर सीजन की आधिकारिक शुरुआत हो गई है। देश और प्रदेश में अब दोबारा से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं। कई राज्यों में लॉकडाउन लगना शुरू हो गया है।
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प्रदेश सरकार भी बंदिशें बढ़ाने की तैयारी में है। ऐसे में इस बार भी समर सीजन के दौरान प्रदेश में कम सैलानियों के आने के आसार हैं। इससे होटल कारोबारियों, टैक्सी चालकों सहित दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पर्यटन कारोबार का बड़ा सहयोग रहता है। लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर पर्यटन गतिविधियों से जुड़े हैं। ऐसे में अगर प्रदेश में आने वाले सैलानियों की आमद कम होती है तो लाखों लोगों को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ेगा।
बीते वर्ष पर्यटन कारोबार को हुए नुकसान की भरपाई अभी तक नहीं हुई है। कई लोगों का रोजगार छीन गया है। होटल कारोबारियों को अपने खर्चे पूरा करने तक मुश्किल हो गए हैं। राजधानी शिमला सहित मनाली, कुल्लू, डलहौजी, कसौली, धर्मशाला, खज्जियार, चंबा सहित अन्य पर्यटन स्थलों में हजारों की संख्या में होटल हैं। यहां आने वाले सैलानियों के चलते टैक्सी चालकों, टूरिस्ट गाइड, टूअर एंड ट्रेवल, साहसिक खेल गतिविधियां करवाने वालों सहित दुकानदारों का कारोबार चलता है।
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हिमाचल में समर सीजन के दौरान लाखों सैलानी पहुंचते हैं। मैदानी राज्यों में पड़ रही गर्मी से राहत के लिए सैलानी पहाड़ों का रुख करते रहे हैं जिससे प्रदेश के लाखों लोगों की रोजी-रोटी चली हुई है। लेकिन कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने पर्यटन गतिविधियों से जुड़े लोगों की परेशानियों को फिर बढ़ा दिया है। हालांकि, सरकार ने अभी सैलानियों के आने पर रोक नहीं लगाई है। सिर्फ कोरोना संक्रमण से बहुत अधिक प्रभावित राज्यों के लोगों को ही निगेटिव कोरोना रिपोर्ट लेकर आने की सलाह दी गई है।