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Shimla News: चेक बाउंस मामले में दोषी को कैद, आठ लाख रुपये जुर्माना

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दोषी ने बैंक से लिया था 22.50 लाख का ऋण
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चेक बाउंस होने पर बैंक ने अदालत में दायर किया था केस
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिमला प्रतिभा नेगी की अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में दोषी चंद्र मोहन को 10 महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर चेक राशि का दोगुना 8 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है।
जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को चार महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अदालत ने आदेश दिया हैं कि जुर्माने की वसूली के बाद यह राशि शिकायतकर्ता बैंक को मुआवजे के तौर पर अदा की जाएगी। शिकायतकर्ता हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक की शाखा टुटू शिमला के अनुसार चौपाल निवासी दोषी चंद्र मोहन ने बावनी गांव में कोरुगेटेड बॉक्स प्लांट स्थापित करने के लिए बैंक से 22,50,000 रुपये का संयुक्त ऋण लिया था। इसमें 14,40,000 रुपये टर्म लोन और 8,10,000 रुपये कैश क्रेडिट लिमिट शामिल थी।
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ऋण की अदायगी में लगातार चूक होने से 9 दिसंबर 2014 तक आरोपी के खाते में 19,31,951 रुपये बकाया हो गए थे। अपनी देनदारी के निपटारे के तहत आरोपी ने 28 नवंबर 2014 को बैंक के पक्ष में भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा शिमला का 4 लाख रुपये का चेक जारी किया था। बैंक ने जब इस चेक को भुगतान के लिए लगाया तो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया था। बैंक द्वारा कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद जब आरोपी ने राशि का भुगतान नहीं किया तो बैंक ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत अदालत में शिकायत दर्ज करवाई थी। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि उसने ऋण राशि का भुगतान कर दिया था और चेक सुरक्षा के तौर पर दिया था। हालांकि बैंक की ओर से पेश साक्ष्यों और रिकॉर्ड से यह सिद्ध हुआ कि चेक जारी करने की तिथि पर आरोपी पर देनदारी बकाया थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का बारीकी से अवलोकन करने के बाद आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अपराध के स्वरूप और गंभीरता को देखते हुए दोषी को प्रोबेशन का लाभ या नरमी नहीं दी जा सकती। इसके चलते अदालत ने दोषी को 10 महीने के कारावास और आठ लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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