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Shimla News: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को 20 साल का कठोर कारावास

Wed, 29 Jul 2026 11:59 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहड़ू।

सार

रोहड़ू के वर्ष 2022 के नाबालिग दुष्कर्म एवं पॉक्सो मामले में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए छह लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने की भी सिफारिश की। फैसले में कहा गया कि यौन अपराधों में एफआईआर दर्ज होने में कुछ देरी होना असामान्य नहीं है।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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रोहड़ू क्षेत्र में नाबालिग से जुड़े चर्चित दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट मामले में विशेष न्यायालय ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (रेप/पॉक्सो) शिमला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि जुर्माना राशि अदा न करने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना 11 और 12 अक्तूबर 2022 की रात की है। 17 वर्षीय युवती बिना बताए अपने घर से रोहड़ू स्थित सहेली से मिलने आई थी। रोहड़ू पहुंचने पर सहेली नहीं मिली तो वह पार्क के पास उसका इंतजार करने लगी। इस दौरान हमीरपुर निवासी मनोहर लाल शर्मा जो रोहड़ू के एक होटल में शेफ के रूप में कार्यरत था, उसके संपर्क में आया।
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अभियोजन के अनुसार आरोपी ने पीड़िता को होटल में कमरा दिलाने का झांसा देकर पार्क व्यू होटल के एक कमरे में ले गया जहां उसने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। अगली सुबह जाते समय आरोपी ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी भी दी। घर लौटने के बाद पीड़िता ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई जिसके आधार पर 15 अक्तूबर 2022 को पुलिस थाना रोहड़ू में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 तथा पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि घटना के चार दिन बाद एफआईआर दर्ज करवाई गई जो संदेह पैदा करती है। यह भी कहा गया कि जिस सहेली से मिलने पीड़िता रोहड़ू आई थी उसे अभियोजन पक्ष ने गवाह के रूप में पेश नहीं किया।

बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) अदालत में पेश नहीं की गई जिससे यह साबित हो सके कि पीड़िता ने आरोपी का फोन इस्तेमाल कर अपनी सहेली को कॉल किया था। इसके अलावा होटल के विजिटर रजिस्टर की केवल फोटोकॉपी पेश किए जाने और सीसीटीवी फुटेज में पीड़िता के होटल में प्रवेश का स्पष्ट दृश्य न होने पर भी आपत्ति जताई गई। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जुर्माने की राशि पीड़िता के पुनर्वास के लिए दी जाएगी। पुनर्वास के लिए छह लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने की भी सिफारिश की है।
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शिकायत दर्ज कराने में देरी असामान्य नहीं
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यौन अपराधों, विशेषकर नाबालिग पीड़िताओं से जुड़े मामलों में शिकायत दर्ज कराने में कुछ देरी होना असामान्य नहीं है। जान से मारने की धमकी और मानसिक आघात के कारण पीड़िता का तुरंत परिवार या पुलिस के सामने घटना का खुलासा न कर पाना स्वाभाविक है। अदालत ने यह भी कहा कि जब यह साबित हो गया कि आरोपी ने पार्क व्यू होटल में कमरा बुक कराया था तो वह इस बात का संतोषजनक उत्तर नहीं दे सका कि रोहड़ू में अपना आवास होने के बावजूद होटल में कमरा लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी। अदालत ने कहा कि जांच में कुछ तकनीकी कमियां होने मात्र से अभियोजन का पूरा मामला खारिज नहीं किया जा सकता।
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