जीएसटी फार्मूले में बदलाव न किए जाने के मामले में हिमाचल ठेकेदार यूनियन भड़क गई है। यूनियन ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर जीएसटी की राशि ठेकेदारों से लेना बंद नहीं किया तो विकास कार्य बंद होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग और प्रदेश सरकार की होगी। वीरवार को शिमला में ठेकेदार यूनियन की बैठक हुई। इसमें मंडी के ठेकेदार की ओर से जीएसटी चुकाने के लिए लिए गए 5 करोड़ के ऋण पर चिंता जताई।
बैठक की अध्यक्षता प्रदेशाध्यक्ष सतीश कुमार बिज ने की। उन्होंने कहा कि ठेकेदार एक जुलाई 2017 से पहले के कार्यों पर पूरा रिफंड मांग रहे हैं, लेकिन अभी तक यह पैसा ठेेकेदार को नहीं दिया गया। उनका तर्क है कि उस समय सरकार में नए टैक्स ढांचा लागू नहीं था। बावजूद इसके पहले के आवंटित कार्यों पर भी रिफंड नहीं मिल रहा है। ठेकेदारों को दो-दो बार जीएसटी देना पड़ता है। सामान खरीदने से लेकर काम की लागत पर ठेकेदार जीएसटी दे रहे हैं।
सतीश कुमार बिज ने कहा कि दो दो बार जीएसटी देने पर ठेकेदारों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा है। सरकार से कई बार इस मामले को उठाया गया। आश्वासन से सिवाय अब तक राहत नहीं दी गई। एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष राजेश सुमन का कहा कि प्रदेश में 10 हजार से अधिक ठेकेदार हैं और सभी को 12 प्रतिशत जीएसटी अदा करने के लिए लोन लेना पड़ रहा है।