इसके बाद अधीक्षण अभियंता ने मामले में संज्ञान लेते हुए ठेकेदार को टेंडर से बाहर कर दिया। अब इसके नए सिरे से टेंडर होंगे। अधीक्षण अभियंता ने इंजीनियर इन चीफ को इस बारे पत्र लिखकर दोबारा से टेंडर करने को कहा है। जानकारी के मुताबिक यह टेंडर करीब 11 करोड़ रुपये का था। इसमें डंगे, कटिंग कलवर्ट और पुल का भी निर्माण किया जाना था। इस काम के लिए ठेकेदार को एक तिहाई काम करना अनिवार्य होता है। पहले टेंडर की टेक्निकल बीड खुलती है। इसमें दस्तावेजों की जांच की जाती है। उसके बाद फाइनेंशियल बीड को खोला जाता है। जिसका रेट कम होता है, उसे टेंडर दिया जाता है।
इधर, इस मामले को लेकर लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता दीपक राज ने बताया कि मामला सामने आने के बाद ठेकेदार से पूछताछ की गई। उन्होंने स्वीकारा है कि उनके कार्यालय के ही व्यक्ति से यह गलती हुई है। उन्होंने कहा कि जिस समय दस्तावेज जमा कराए गए। वह किसी काम के चलते बाहर थे। इधर, ठेकेदार ने बताया कि उनके व्यक्ति से यह गलती हुई है। लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता के पास जाकर गलती को स्वीकारा गया है।
ठेकेदार पर ऐसे लगे गड़बड़झाला करने के आरोप
आरोप है कि ठेकेदार ने टेंडर में भाग लेने के लिए वर्क डन सर्टिफिकेट में राशि में गड़बड़ी कर दी। ताकि वह इस टेंडर में भाग ले सके। टेंडर की शर्त के मुताबिक टेंडर में भाग लेने के लिए ठेकेदार को कुल राशि का एक तिहाई काम पहले किया होना अनिवार्य था। अब मामले की जांच के बाद टेंडर को रद्द कर दिया गया है। इस काम के लिए अब फिर से टेंडर करवाए जाएंगे।