दोषी ने ली थी 3.20 लाख की वित्तीय सहायता
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा नेगी की अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए एक साल के साधारण कारावास और 6.40 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की यह राशि मूल चेक की राशि 3.20 लाख रुपये से दोगुनी तय की है।
सुन्नी निवासी शिकायतकर्ता तोता राम ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी कि शिमला निवासी दोषी ठेकेदार मनोज कुमार ने वर्ष 2012 से 2023 के दौरान विभिन्न समय पर वित्तीय सहायता ली थी और उनकी दुकान से सामान भी खरीदा था। इस तरह 3.50 लाख रुपये की देनदारी बनती थी। इस देनदारी को चुकाने के लिए दोषी मनोज कुमार ने 16 अगस्त 2023 को चेक जारी किया था।
शिकायतकर्ता ने जब यह चेक अपने बैंक में भुगतान के लिए लगाया तो खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने से चेक बाउंस हो गया। इसके बाद कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद जब आरोपी ने भुगतान नहीं किया तो धारा 138, एनआई एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने दलील दी कि चेक शिकायतकर्ता ने उसकी गाड़ी से चुराया था और उस पर किए हस्ताक्षर उसके नहीं हैं।
अदालत ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि दोषी ने अपने पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य दस्तावेजों पर जो हस्ताक्षर किए हैं, वह चेक पर मौजूद हस्ताक्षरों से पूरी तरह मेल खाते हैं। इसके अलावा अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि यदि वास्तव में चेक चोरी हुआ था या उसका दुरुपयोग किया जा रहा था तो आरोपी ने अपने बैंक को तत्काल इसकी सूचना क्यों नहीं दी। अदालत ने आरोपी के बयानों को मनगढ़ंत पाया और उसे दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।