हाईकोर्ट ने कनिष्ठ अभियंताओं की अवमानना याचिका को खारिज किया है, जिसमें कनिष्ठ अभियंताओं ने वर्ष 1995-1996 में अनुबंध पर दुर्गम क्षेत्रों में बिना लोक सेवा आयोग को कंसल्ट कर स्टॉप गैप अरेंजमेंट के तहत बिना आरएंडपी रूल्स को फॉलो किए रखा था।
ये इंजीनियर सर्विस बेनिफिट को लेकर कोर्ट में गए थे। नरेंद्र नायक, छविंद्र और अन्य कनिष्ठ अभियताओं ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। वर्ष 1999 में सरकार ने इन्हें नौकरी से निकालने का निर्णय लिया, लेकिन इन कनिष्ठ अभियंताओं ने ट्रिब्यूनल से स्टे ले लिया था।
इसके बाद ट्रिब्यूनल ने नरेंद्र नायक को छोड़कर अन्य कनिष्ठ अभियंता की याचिकाओं का निपटारा किया गया। सरकार ने वर्ष 2004 में नए भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत अनुबंध पर रखे इन कनिष्ठ अभियंताओं को नियमित कर दिया।
नरेंद्र नायक की याचिका ट्रिब्यूनल से निरस्त होने के बाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया। यह कनिष्ठ अभियंता वित्तीय लाभ को लेकर हाईकोर्ट गए थे। जहां इनकी अवमानना याचिका खारिज हुई है।