अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने सहारा क्रेडिट सहकारी समिति को आरडी और एफडी के पैसे देने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा आयोग ने 15 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च देने के आदेश दिए गए हैं। आयोग ने सहारा समिति को आरडी और एफडी की राशि को नौ फीसदी के साथ 45 दिन के भीतर अदा करने के आदेश दिए हैं।
ठियोग निवासी सुनील कुमार की शिकायत को स्वीकार करते हुए आयोग ने यह आदेश पारित किए। आयोग को शिकायत की गई थी कि उसने सहारा समिति के पास योजना के तहत 03.01.2013 को पांच साल के लिए पैसे जमा करवाए थे। योजना यह थी कि 60 महीनों के लिए उसे 1,300 रुपये प्रति माह जमा करवाने थे और पांच वर्ष के बाद शिकायतकर्ता को 1,10,010 रुपये लौटाने थे। 03.01.2013 से दिसंबर 2017 तक शिकायतकर्ता प्रति माह 1300 रुपये जमा करवाता रहा और कुल 78,000 रुपये जमा किए। 60 माह की अवधि पूर्ण होने पर शिकायतकर्ता ने राशि जारी करने के लिए सहारा समिति से संपर्क किया, लेकिन आज तक उसे कोई भी राशि नहीं दी गई।
यह भी शिकायत की गई कि शिकायतकर्ता ने 10,000/- रुपये की एफडी भी शुरू की थी। परिपक्वता की अवधि के बाद उसे 11,630 रुपये का भुगतान किया गया था। सहारा क्रेडिट सहकारी समिति के अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला में शिकायत की। आयोग के समक्ष सहारा क्रेडिट सहकारी समिति ने दलील दी कि शिकायतकर्ता आयोग के समक्ष समिति के खिलाफ शिकायत नहीं कर सकता है। आयोग ने शीर्ष अदालत के निर्णय का हवाला देते हुए समिति की दलीलों को नकार दिया और शिकायतकर्ता की शिकायत को स्वीकार किया।