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बीमा कंपनी को देना होगा 22.50 लाख मुआवजा

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जले हुए मकान की बीमा राशि देने में आनाकानी करने वाली बीमा कंपनी को शिकायतकर्ता के पक्ष में 22.50 लाख मुआवजा देना होगा। 50 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना के एवज में भी चुकाने होंगे। एचपी स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने मामले की सुनवाई के बाद शिकायतकर्ता के पक्ष में यह फैसला सुनाया है।
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सैंज खाद गांव के बीर सिंह राणा बीमा कंपनी के खिलाफ कमीशन पहुंचे थे। उनके मुताबिक कुपवी में बने घर को उन्होंने 20 मई 2008 से 19 मई 2013 तक 30 लाख रुपये में बीमित कराया था। इसी बीच 17 मई को आग से मकान जलकर राख हो गया। 18 मई को इस संबंध में पुलिस में रिपोर्ट की गई।

इंश्योरेंस कंपनी को भी सूचना दी गई, लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो बीर सिंह ने कंपनी से बीमित राशि 30 लाख समेत 3 लाख की क्षतिपूर्ति की मांग करते हुए कंपनी के डिविजनल मैनेजर के खिलाफ एचपी स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन में इसी 21 अप्रैल को शिकायत दर्ज कराई।
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9 फीसदी वार्षिक ब्याज की दर के साथ मिलेगा मुआवजा

कमीशन के अध्यक्ष जस्टिस सुरजीत सिंह ने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि शिकायतकर्ता ने मकान का कंपनी से बीमा कराया था। सूचना दिए जाने और सर्वेयर के नियुक्त किए जाने के बाद कंपनी क्लेम से केवल इस आधार पर नहीं मुकर सकती कि सर्वेयर को घटना स्थल पर नहीं ले जाया गया। यह सर्वेयर का कर्त्तव्य था कि वह स्वयं मौके पर जाते। तथ्यों का सत्यापन करते और नुकसान का आकलन करते।

उन्होंने शिकायतकर्ता को बीमित राशि के 75 प्रतिशत का हकदार मानते हुए कंपनी को शिकायत की तिथि से 9 फीसदी वार्षिक ब्याज की दर के साथ 22.50 लाख का मुआवजा देने के निर्देश दिए। कंपनी को शिकायतकर्ता के मानसिक उत्पीड़न के एवज में 50 हजार समेत वाद खर्च 10 हजार रुपये भी एक माह के भीतर चुकाने के निर्देश दिए गए।
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