जहां से पुन: सुनवाई के आदेश 19 जून 2007 को हुए। इसके उपरांत जिला उपभोक्ता फोरम ने फिर से 10 अप्रैल 2008 को रत्न लाल की शिकायत को स्वीकार करते हुए फिर से कंपनी को आदेश दिया कि शिकायतकर्ता को नया ट्रैक्टर 30 दिनों के भीतर दे व 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए।
इसके साथ ही आदेश जारी किया कि यदि कंपनी 30 दिनों के भीतर नया ट्रैक्टर न दे पाए तो कंपनी रत्न लाल को 3,60000 रुपये की राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित दे। उन्होंने बताया कि इस फैसले के बाद भी कंपनी ने न तो रत्न लाल को नया ट्रैक्टर दिया और न ही पैसा लौटाया। जब कंपनी ने फोरम के फैसले की पालना नहीं की तो रत्न लाल ने अगस्त 2008 में फैसले को लागू करने के लिए फोरम में आवेदन दायर किया।
इस आवेदन पर कंपनी ने करीब 11 साल तक समन नहीं रिसीव किए और मामला लटका रहा। फोरम ने गिरफ्तारी वारंट जारी किए। इस पर कंपनी ने 3,60,000 रुपये की राशि ब्याज सहित कुल 8,64,064 रुपये जमा करवा दिए। फोरम ने यह राशि रत्न लाल के आवेदन पर उसे जारी करने के आदेश दिए हैं।