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कांग्रेस विधायक आशा कुमारी को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत

Sun, 20 Mar 2016 09:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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विशेष जज ने विधायक आशा कुमारी को 26 फरवरी को एक साल की सजा सुनाई थी। - फोटो : फाइल फोटो
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव और डलहौजी की विधायक आशा कुमारी को 67.3 बीघा जमीन धोखे से हथियाने के मामले में सुनाई गई एक साल की सजा पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश राजीव शर्मा ने आशा कुमारी की ओर से दायर अपील को सुनवाई के लिए मंजूर करने के बाद आदेश जारी किए हैं।
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कोर्ट ने 10 हजार रुपये के मुचलके के साथ उन्हें जमानत पर रिहा करने के आदेश भी पारित किए हैं। बता दें कि 26 फरवरी 2016 को विशेष जज चंबा की अदालत ने आशा कुमारी समेत 13 लोगों को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी। इस मामले में छह आरोपियों की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है।

मामले के अनुसार पूर्व मंत्री आशा कुमारी ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर सरकारी जमीन को धोखाधड़ी से बेच दिया। इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए फर्जी दस्तावेज भी तैयार किए गए।
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राजा लक्ष्मण सिंह की कुछ जमीन लैंड सीलिंग एक्ट के तहत सरकारी भूमि में तबदील हो गई थी। इस भूमि को हड़पने के इरादे से कुछ आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए। वर्ष 2001 में पूर्व पार्षद कुलदीप सिंह ने इस धोखाधड़ी की शिकायत विजिलेंस से की थी।
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पहले भी मिल चुकी है हाईकोर्ट से राहत

कांग्रेस विधायक आशा कुमारी। - फोटो : फाइल फोटो
जांच के बाद पाया गया कि आशा कुमारी के पति बिजेंद्र सिंह ने अपने नौकरों के नाम की जीपीए आशा कुमारी के नाम बनवाई और इस जीपीए के आधार पर आशा कुमारी ने उक्त सरकारी भूमि अपने पति को बेच दी। विशेष अदालत चंबा ने आशा कुमारी और कुछ अन्य को दोषी पाते हुए एक और कुछ को तीन साल कारावास की सजा सुनाई थी।

जिस समय चंबा कोर्ट में आशा कुमारी के खिलाफ आरोप तय हुए थे, उस समय भी विधायक हाईकोर्ट गई थीं। उनका आरोप था कि उन्हें चंबा कोर्ट पर विश्वास नहीं है। हाईकोर्ट ने मामला चंबा कोर्ट से कांगड़ा शिफ्ट कर दिया था।

कांगड़ा कोर्ट ने आशा कुमारी के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि चंबा में उन्हें ढंग से पक्ष रखने का मौका नहीं मिला। हाईकोर्ट ने भी इस पर मुहर लगाई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को रद्द करते हुए चंबा की विशेष अदालत को मामले की सुनवाई के आदेश दिए थे।
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