कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री एवं लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि देश आज भी सामाजिक एवं आर्थिक समानता की दृष्टि से गुलाम है।
हम 15 अगस्त 1947 को भले ही आजाद हो गए, लेकिन देश को सामाजिक एवं आर्थिक असमानता की गुलामी से आज तक मुक्त नहीं कर पाए हैं।
जब तक इस देश के प्रत्येक नागरिक का समान रूप से विकास नहीं होता, तब तक हम पूरी तरह से खुद को आजाद नहीं मान सकते।
रविवार को मीरा कुमार बाबू जगजीवन राम संस्थान मैहतपुर के राष्ट्रीय सेमिनार में संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि वोट बैंक के चलते समाज को आज टुकड़ों में बांटकर रखा है, इसीलिए दबे कुचले लोगों का जीवन स्तर सुधर नहीं पाया है।
मीरा कुमार ने कहा वह खुशकिस्मत हैं कि दलित वर्ग से ताल्लुक रखती हैं, क्योंकि इस वर्ग को नजदीक से समझने का जो अवसर उन्हें मिला है, वह शायद किसी दूसरे को नहीं मिल सकता।
हमारी सोच आज भी 12वीं सदी की
खुद गांधी जी ने किसी के पूछने पर कहा था, अगर उन्हें दूसरा जन्म मिलेगा तो वह मैला ढोने वाले परिवार में जन्म लेना चाहेंगे, ताकि वह इस वर्ग की पीड़ा को महसूस कर सकें।
उन्होंने कहा कि हम 21वीं सदी में जरूर जी रहे हैं लेकिन हमारी सोच आज भी 12वीं सदी की है। जातिप्रथा गैर बराबरी पर आधारित है।
कैसी इससे पूर्व बीजेआर संस्थान के संस्थापक डॉ. केआर आर्य ने मीरा कुमार समेत प्रदेश सरकार के मंत्रियों, अन्य अतिथियों का स्वागत किया, वहीं ट्रस्ट की निदेशक डॉ. शंकुतला आर्य ने सेमिनार में पधारे तमाम लोगों का धन्यवाद किया।
इस मौके पर उद्योगमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, परिवहन मंत्री जीएस बाली, अविनाश कपिला, कामरेड जगतराम, लोधी समाज के अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण मित्तल समेत अनेक अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।