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राजनीतिक रसूख के चलते विजिलेंस से बचता रहा सहायक दवा नियंत्रक

Wed, 28 Aug 2019 10:19 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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निशांत सरीन(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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फार्मा कंपनियों के पैसे पर पांच सितारा होटलों में ऐश करने वाले सहायक दवा नियंत्रक निशांत सरीन का राजनीतिक रसूख भी कम नहीं रहा है। सरकारी तंत्र का संरक्षण इसे हर बार बचाता रहा।

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साल 2005 में पांच हजार रुपये की घूस लेते रंगे हाथ विजिलेंस की ओर से पकड़े जाने के बावजूद सरीन ड्रग इंस्पेक्टर से लेकर सहायक दवा नियंत्रक तक के ओहदे तक पहुंच गया। तत्कालीन सरकार ने विजिलेंस को अभियोजन मंजूरी दी और न ही उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की गई। 

निशांत सरीन को साल 2005 में विजिलेंस ने बिलासपुर में एक अस्पताल संचालक से पांच हजार रुपये घूस लेते पकड़ा था। मामले की जांच के एक साल बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सरीन के खिलाफ विजिलेंस को अभियोजन स्वीकृति देने से इंकार कर दिया।
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खास बात यह है कि रंगे हाथ घूस लेने के मामले में सरकार ने उसके ईमानदार और कर्मठ होने की दलील तक दे डाली। इसके बाद सत्तासीन हुई भाजपा सरकार ने 2008 में उन्हीं साक्ष्यों के  आधार पर सरीन के खिलाफ अभियोजन मंजूरी दे दी। 
 

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जिसे उसने कोर्ट में चुनौती दे दी और अंत में सुप्रीम कोर्ट तक ने सरकार के उस आदेश को खारिज कर दिया। एक बार अभियोजन स्वीकृति खारिज होने के बाद उन्हीं साक्ष्यों पर दोबारा मंजूरी नहीं दी जा सकती। इसके बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

लगातार शिकायतों के बीच 2016 में विजिलेंस ने फिर वीरभद्र सरकार को पत्र लिखकर सरीन के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए कहा, लेकिन सरकार ने उस पर कभी कार्रवाई ही नहीं की। आखिरकार अब फिर शिकायत के बाद विजिलेंस ने कार्रवाई की और जयराम सरकार ने मामला दर्ज कर जांच की मंजूरी दे दी।

इसके चलते सरीन अब विजिलेंस की पकड़ से बचने के लिए अंडरग्राउंड हो गया है। सूत्रों का कहना है कि विजिलेंस उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी कोर्ट से हासिल करने के लिए प्रयास कर रही है।
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