जिसे उसने कोर्ट में चुनौती दे दी और अंत में सुप्रीम कोर्ट तक ने सरकार के उस आदेश को खारिज कर दिया। एक बार अभियोजन स्वीकृति खारिज होने के बाद उन्हीं साक्ष्यों पर दोबारा मंजूरी नहीं दी जा सकती। इसके बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
लगातार शिकायतों के बीच 2016 में विजिलेंस ने फिर वीरभद्र सरकार को पत्र लिखकर सरीन के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए कहा, लेकिन सरकार ने उस पर कभी कार्रवाई ही नहीं की। आखिरकार अब फिर शिकायत के बाद विजिलेंस ने कार्रवाई की और जयराम सरकार ने मामला दर्ज कर जांच की मंजूरी दे दी।
इसके चलते सरीन अब विजिलेंस की पकड़ से बचने के लिए अंडरग्राउंड हो गया है। सूत्रों का कहना है कि विजिलेंस उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी कोर्ट से हासिल करने के लिए प्रयास कर रही है।