कब किस पार्टी से कौन बना सांसद
1977 बालकराम भारतीय लोक दल
1980 कृष्णदत्त सुल्तानपुरी कांग्रेस
1984 कृष्णदत्त सुल्तानपुरी कांग्रेस
1989 कृष्णदत्त सुल्तानपुरी कांग्रेस
1991 कृष्णदत्त सुल्तानपुरी कांग्रेस
1996 कृष्णदत्त सुल्तानपुरी कांग्रेस
1998 कृष्णदत्त सुल्तानपुरी कांग्रेस
1999 धनीराम शांडिल हिमाचल विकास कांग्रेस
2004 धनीराम शांडिल कांग्रेस
2009 वीरेंद्र कश्यप भाजपा
2014 वीरेंद्र कश्यप भाजपा
शिमला लोकसभा सीट में सोलन, शिमला और सिरमौर तीन जिले शामिल हैं। शिमला की कुल जनसंख्या का 26.51 फीसदी हिस्सा अनुसूचित जाति का है जबकि 1.08 फीसदी लोग अनुसूचित जनजाति से हैं।
सोलन में 28.35 फीसदी अनुसूचित जाति जबकि 4.42 फीसदी अनुसूचित जनजाति के लोग हैं। सिरमौर में 30.34 फीसदी अनुसूचित जाति और 2.13 फीसदी जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है।
पहले लोग बेधड़क होकर वोट डालने जाते थे। किसी का डर न कोई दबाव। आज के हालात उलट हैं। यह कहना है कोटखाई के पुजाली गांव निवासी 86 वर्षीय रिटायर्ड अध्यापक जयराम शर्मा का। जयराम कहते हैं कि पहली बार लोकसभा चुनावों के लिए 1972 में वोट डाला था।
उस समय लोग वोट डालने को लेकर जागरूक नहीं थे। करीब 50 फीसदी लोग तो वोट देते ही नहीं थे, लेकिन अब लोग जागरूक हैं। युवा तोे वोट डालने के लिए बहुत उत्साहित रहते हैं।
उस समय राह चलते अगर किसी ने बोल दिया कि फलां निशान पर मुहर लगानी है तो लोग उसी जगह वोट दे देते थे, लेकिन अब प्रत्याशी से लेकर पार्टी तक को हर कसौटी पर जांचा परखा जाता है।
जयराम शर्मा ने बताया कि 1972 से लेकर 2014 तक एक आध चुनाव को छोड़ कर उन्होंने सभी चुनावों में वोट दिया है। नौकरी के समय कई बार चुनाव ड्यूटी भी दी। घर से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर बागा पोलिंग बूथ पर वोट डालने पैदल जाते थे।
अब लोग अपनी गाड़ियों में वोट डालने जाते हैं। कई बार पार्टी वाले ही वोटरों के लिए गाड़ियों का इंतजाम कर देते हैं। 9 अक्तूबर 1953 को उनकी नौकरी लगी और 11 जनवरी 1991 को रिटायर हुए। रिटायर होने के बाद भी हर चुनाव में वोट डाला।
जंगली जानवरों से फसलों की बरबादी की रोकथाम
विदेशी सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाना
फलों के जूस पर लगने वाले उद्योग भी भाषणों तक सिमटे
पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य और सड़कों की हालत नहीं सुधरी
स्वरोजगार देने की घोषणाएं भी फाइलों तक सिमटीं
कुल वोटर 12,23,290
पुरुष मतदाता 633544
महिला वोटर 589712
कुल मतदान केंद्र 2066
1967 में चौथे लोक सभा चुनाव में शिमला संसदीय (एससी) सीट बनी। इससे पहले यह सीट मंडी-महासू लोकसभा सीट थी। दूसरे चुनाव में इसे महासू कर दिया गया। 1962 में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह महासू सीट से अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़े और भारी मतों से विजयी बने।
1967 में महासू सीट को शिमला (एससी) सीट बना दिया। इस सीट पर भाजपा ने 1989 में 9वें लोकसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी बालक राम को मैदान में उतारा, लेकिन वे चुनाव हार गए। 10वें लोस चुनाव 1991 में भाजपा के मौजूदा सांसद वीरेंद्र कश्यप जनता दल (जेडी) से चुनाव लड़े और हार गए।
इसके बाद 1996 में 11वें चुनाव में वीरेंद्र कश्यप भाजपा के प्रत्याशी बनकर चुनाव में आए। इस बार भी वह हार गए। सीपीएम ने भी पहली बार इस सीट से प्रत्याशी मैदान में उतारा।
1998 के चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी के तौर पर कश्यप ने लगातार तीन बार हार की हैट्रिक लगाई। 1999 और 2004 के चुनाव में भाजपा ने इस सीट से कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा।
इस सीट से अभी तक 87 प्रत्याशी चुनाव लड़ चुके हैं। शिमला संसदीय क्षेत्र में कुल 17 विस सीटें हैं। इसमें शिमला में सात, सोलन में पांच और सिरमौर में पांच सीटें हैं।
शिमला संसदीय सीट में कुल 12 लाख 30 हजार 534 वोटर हैं। इनमें 6 लाख 40 हजार 755 पुरुष और 5 लाख 89 हजार 779 महिलाएं वोटर हैं। शिमला में 2 लाख 49 हजार 233 पुरुष और 2 लाख 33 हजार 165 वोटर हैं।
सोलन से 2 लाख 148 पुरुष और 1 लाख 85 हजार 529 महिला वोटर हैं। सिरमौर से 1 लाख 91 हजार 374 पुरुष और 1 लाख 71 हजार 85 महिलाएं हैं।
लोकसभा चुनावों में जीत-हार का अंतर
वर्ष कांग्रेस भाजपा
2014 3,01,786 3,85,973
2009 2,83,619 3,10,946
2004 3,11,182 2,03,002
वर्ष कांग्रेस
- 1999 2,17,072 एचवीसी- 2,64,002
- 1998 3,07,861 बीजेपी- 2,65,836
- 1996 2,61,965 बीजेपी- 1,70,832
- 1991 2,09,406 बीजेपी- 1,62,546
- 1989 2,01,912 बीजेपी- 1,44,922
- 1984 2,44,010 जेएनपी- 47,719
- 1980 1,36,841 जेएनपी- 1,01,707
- 1977 85,472 बीएलडी- 1,72763
- 1971 1,36,789 एनसीओ- 9,238
- 1967 72,870 बीजेएस- 39,740
- 1961 49,011 आईएनडी- 14,757
-1957 47,152 कांग्रेस- 41,433
-1951 47,800 कांग्रेस- 45,372