रामकृष्ण मिशन आश्रम और हिमालयन ब्रह्मो समाज के बीच शनिवार रात को हुआ विवाद
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। रामकृष्ण मिशन आश्रम शिमला में शनिवार देर रात हुए विवाद मामले में दोनों संस्थाओं के अनुयायियों ने एक-दूसरे पर पथराव करने और गमलों-डंडों से हमले के आरोप लगाए। शनिवार देर रात शिमला में रामकृष्ण मिशन आश्रम के अनुयायियों और हिमालयन ब्रह्मो समाज के अनुयायियों के बीच यह विवाद हुआ। इस मामले में रामकृष्ण मिशन आश्रम के सह सचिव स्वामी रामरूपानंद ने बताया कि हिमालयन ब्रह्म समाज ने वर्ष 2014 में जमीन को रामकृष्ण मिशन आश्रम को गिफ्ट डीड कर दिया है। जमीन हड़पने के लिए समानांतर संगठन का गठन किया गया है। शनिवार शाम भक्त बनकर आए करीब 100 लोग मंदिर में दाखिल हुए। जब उनसे मंदिर बंद करने के लिए कहा तो उन्होंने बाहर निकलने से इन्कार कर दिया। पुलिस और प्रशासन ने हमें ही हमारे मंदिर में नहीं जाने दिया। प्रशासन चाहता तो पथराव की स्थिति नहीं बनती।
वहीं, हिमालयन ब्रह्म समाज की संयुक्त सचिव शैल पंडित ने बताया कि हिमालयन ब्रह्म समाज ने कानूनी रूप से रामकृष्ण मिशन आश्रम को इस संपत्ति को गिफ्ट डीड कर दिया है। संपत्ति हड़पने के लिए साजिश रची जा रही है। इसके लिए समानांतर संस्था का गठन किया है। शनिवार को मंदिर में सुंदरकांड का पाठ था। इसी दौरान थोड़ी देर में ही पूरा हॉल लोगों से भर गया। कुछ समय तक सबकुछ ठीक चलता रहा, लेकिन रात को मैं अपने कमरे में चली गई। देर रात तेज आवाजें आने लगीं और पथराव होने लगा। इस पूरे मामले में मूकदर्शक बनी रही पुलिस और प्रशासन की भूमिका संदेहास्पद है।
उधर, भारतवर्षीय ब्रह्म समाज की अध्यक्ष डाॅ. सुमंता नियोगी और हिमालयन ब्रह्मो समाज शिमला के ट्रस्टी एवं महासचिव विशाल शर्मा ने बताया कि ऑल इंडिया ब्रह्मो कॉन्फ्रेंस का कार्यक्रम कालीबाड़ी मंदिर में 15 से 16 नवंबर तक था। इसमें देशभर के विभिन्न ब्रह्म समाज के पदाधिकारी आए थे। शनिवार शाम ब्रह्म समाज के लोग ब्रह्म समाज मंदिर परिसर में पहुंचकर ब्रह्म उपासना करने लगे। लोगों ने कलश स्थापना की, लेकिन तन्महिमानंद और रामरूपानंद ने परिसर में पूजा कर रहीं महिलाओं से अभद्र व्यवहार किया और कलश भी खंडित कर दिया। तन्महिमानंद ने लोगों को बुलाकर ब्रह्म समाज के लोगों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी।