ठाकुर ने कहा कि लेखा-परीक्षा रिपोर्ट में वर्ष 2020 से 2023 के बीच हुई नियुक्तियों पर गंभीर आपत्तियां दर्ज हैं। प्रमाण-पत्रों, शैक्षणिक योग्यताओं और पात्रता संबंधी दस्तावेजों के सत्यापन पर भी सवाल उठे हैं। उन्होंने प्रत्येक नियुक्ति की पात्रता और चयन प्रक्रिया की जांच की मांग की। दोषी पाए जाने वालों पर कानूनी कार्रवाई और अवैध लाभ की वसूली की मांग की गई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता का अर्थ जवाबदेही से मुक्ति नहीं है। भर्ती व्यवस्था में सुधार जरूरी है, लेकिन स्वायत्तता समाप्त करना समाधान नहीं हो सकता। संवाद