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विधानसभा में शोकोद्गार: सीएम जयराम बोले- पंडित सुखराम के मन में रहा मुख्यमंत्री नहीं बनने का मलाल

Wed, 10 Aug 2022 08:32 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के अलावा 14 मंत्रियों और विधायकों ने दिवंगत पूर्व विधायकों को याद किया। शोकोद्गार का प्रस्ताव रखते हुए सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री न बनने का पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम के मन में मलाल रह गया। 
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश की 13वीं विधानसभा के 15वें सत्र की बुधवार को शोकोद्गार के साथ शुरुआत हुई। सुबह 11:00 बजे से 1:15 बजे तक सदन में चार दिवंगत पूर्व विधायकों पंडित सुखराम, रूप सिंह चौहान, मस्त राम और प्रवीण शर्मा को श्रद्धांजलि दी गई। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के अलावा 14 मंत्रियों और विधायकों ने दिवंगत पूर्व विधायकों को याद किया। शोकोद्गार का प्रस्ताव रखते हुए सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री न बनने का पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम के मन में मलाल रह गया। मुख्यमंत्री बनना उनका लक्ष्य था। सार्वजनिक तौर पर भी सुखराम इस बात को कहते थे। वर्ष 1993 के चुनावों के दौरान उनका नाम मुख्यमंत्री की दौड़ में था। मंडी जिले से नौ सीटें तब कांग्रेस ने जीती थीं। बावजूद इसके वह मुख्यमंत्री नहीं बन सके। संचार क्रांति के लिए सुखराम को हमेशा याद रखा जाएगा। वर्ष 1998 में हिमाचल विकास कांग्रेस का उन्होंने गठन किया। भाजपा के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार बनाई थी। सीएम ने कहा कि सफेद मूछें पूर्व मंत्री प्रवीण शर्मा की पहचान थीं। संगठन के लिए उन्होंने बहुत कार्य किया।

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पूर्व विधायक दिवंगत रूप सिंह चौहान और मस्त राम को भी याद किया। नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पंडित सुखराम को राजनीति के चाणक्य के तौर पर जाना जाएगा। कहा कि दिवंगत प्रवीण शर्मा ने मुझे राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। अपने क्षेत्र में काफी अधिक विकास करने के बाद भी वह चुनाव हार गए थे। दिवंगत पूर्व विधायक मस्त राम का दुखद परिस्थितियों में निधन हुआ। मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि सुखराम जननायक थे। कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सुक्खू ने कहा कि सुखराम के चलते ही भाजपा का प्रदेश में उदय हुआ। पूर्व विधायक मस्त राम को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने वाली परिस्थितियों पर उन्होंने विचार करने का आग्रह किया। मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि 1977 में जनता पार्टी की लहर के बावजूद सुखराम कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीते थे। शोकोद्गार में मंत्री वीरेंद्र कंवर, राकेश पठानिया, विधायक रोहित ठाकुर, विनय कुमार, कर्नल धनीराम शांडिल, राकेश सिंघा, बलवीर सिंह, राकेश जम्वाल, विक्रमादित्य सिंह, हीरालाल और अनिल शर्मा ने भी भाग लिया।

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पंडित सुखराम और वीरभद्र मेरे गुरु: अनिल

विधानसभा में मानसून सत्र के पहले दिन शोकोद्गार प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए पूर्व मंत्री और विधायक अनिल शर्मा ने कहा कि दिवंगत पंडित सुखराम और दिवंगत वीरभद्र सिंह उनके गुरु रहे हैं। दोनों का प्रदेश के विकास में विशेष योगदान रहा है। सुखराम शर्मा संचार क्रांति के लिए जाने जाते हैं और वीरभद्र सिंह को विकास के लिए जाना जाता है। विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार ने कहा कि प्रदेश में जो भी नेता सत्ता में रहे हैं, उनका प्रदेश के विकास में पूरा योगदान रहा है। डॉ. वाईएस परमार ने भी प्रदेश के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। मैं भी इस प्रस्ताव में स्वयं को शामिल करता हूं।  

अनिल ने कहा कि अब नेता बनते ही वह अपने बेटों को पहले ठेकेदार बनाते हैं, जबकि उनको कभी ऐसा लाभ नहीं दिया गया। नेता को बनाने वाली जनता होती है। तभी नेता बनते हैं, जब जनता चाहती है।  मेरे लिए बिजली बोर्ड लेने के पीछे सबसे बड़ कारण यही था कि सुखराम चाहते थे कि जब बिजली सस्ती होती है तो सिंचाई जल ऊंचाई में पहुंचाने में बिजली उपयोग में लाई जाए। जब बिजली महंगा होती है तो उसे बेचा जाए। हिमाचल के राजस्व में वृद्धि जरूरी है। 
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