हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चरस रखने के आरोपी को सशर्त जमानत दे दी है। न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने आरोपी सुमन कुमार को 50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने शर्त लगाई है कि याचिकाकर्ता अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों से छेड़छाड़ नहीं करेगा और पुलिस जांच में शामिल होगा। बिना अदालत की अनुमति से वह भारत से बाहर नहीं जाएगा। अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता अदालत की ओर से लगाई गई शर्तों का उल्लंघन करता है तो पुलिस जमानत रद्द करने के लिए आवेदन कर सकती है। मामले के अनुसार पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पुलिस थाना दाड़लाघाट में मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
पांच जनवरी को पुलिस ने दाड़लाघाट में नाका लगाया था। रात करीब 10:00 बजे पुलिस ने याचिकाकर्ता के ट्रक को तलाशी के लिए रोका। इस दौरान पुलिस ने आरोपी से 427 ग्राम चरस बरामद की थी। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया था। आरोपी ने दलील दी कि उसे चरस रखने के मामले में झूठा फंसाया गया है। अदालत ने पाया कि आरोपी से बरामद की गई चरस की मात्रा वाणिज्यिक नहीं है। मामले पर विचार करने से पहले ही आरोपी को सजा देना गैर कानूनी है। उस समय तक आरोपी को जेल में बंद नहीं रख सकते हैं। अदालत ने उसे सशर्त जमानत देने का यह निर्णय सुनाया।
अफीम रखने के आरोपी जिला अदालत से बरी
जिला अदालत चक्कर ने सौ ग्राम अफीम रखने के दो आरोपियों को बरी किया है। विशेष जज शिमला की अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से दायर अभियोग को खारिज कर दिया है। बिलासपुर निवासी विशाल चंदेल और राजीव कुमार से पुलिस ने सौ ग्राम अफीम पकड़ी थी। 23 अगस्त 2018 को विधानसभा सत्र के दौरान पुलिस ने ताराहॉल के पास नाका लगाया था। वाहनों की तलाशी के समय पुलिस ने आरोपियों से अफीम बरामद की थी। उनके खिलाफ पुलिस थाना सदर शिमला में मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की। अभियोजन पक्ष ने नामित आरोपियों के खिलाफ विशेष जज शिमला की अदालत में अभियोग दायर किया। अभियोग साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने 16 गवाहों के बयान दर्ज करवाए। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष की ओर से पुलिस अधिकारियों के बयान आपस में विरोधाभासी है। अभियोजन पक्ष नामित आरोपियों के खिलाफ अभियोग साबित करने में नाकाम रहा है।