मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने शिमला में प्रेस वार्ता में कंप्यूटर शिक्षकों के शोषण का आरोप लगाया।
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प्रदेश के 1100 से अधिक सरकारी स्कूलों में पहली जुलाई से कंप्यूटर शिक्षा बंद हो सकती है। निजी कंपनी नाइलिट को दोबारा एक्सटेंशन देने की तैयारियों के विरोध में शिक्षक उतर आए हैं। एक अप्रैल से 30 जून तक कंपनी को सरकार ने तीन महीने की एक्सटेंशन दी है।
कंप्यूटर शिक्षकों ने फैसला लिया है कि 30 जून को बैठक कर कक्षाओं का बहिष्कार करने का फैसला लिया जा सकता है। निजी कंपनी के तहत 1400 से अधिक कंप्यूटर शिक्षक कार्यरत हैं। मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने शिमला में प्रेस वार्ता में कंप्यूटर शिक्षकों के शोषण का आरोप लगाया।
बताया कि 21 जून को मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि कंप्यूटर शिक्षकों के लिए नीति बनाई जाएगी, लेकिन अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कंपनी को दोबारा एक्सटेंशन देने की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों ने बताया कि 30 जून को दोबारा कंपनी का सेवाकाल बढ़ा दिया जाएगा।
कहा कि अगर ऐसा हुआ तो शिक्षकों को विरोध के लिए बड़ा कदम उठाना पड़ेगा। बताया कि कंप्यूटर शिक्षकों को सितंबर 2015 का वेतन नहीं दिया गया है। करीब 600 शिक्षकों का वेतन अभी लंबित है। अप्रैल और मई 2016 की तनख्वाह भी नहीं दी गई है।
वेतन को लेकर दिया सरकार को सुझाव
चौहान ने पंजाब तर्ज पर हिमाचल में कंप्यूटर शिक्षकों को सोसायटी में लाकर नियमित करने की मांग की। कहा कि बच्चों से प्रतिमाह ली जाने वाली 110 रुपये फीस का शिक्षा विभाग को एक अलग हेड बनाना चाहिए।
इसी से वेतन की अदायगी होनी चाहिए। इस दौरान राजेश वर्मा, जगदीश, पदम, गगन, कमल, उपासना, किरण, सीमा कटोच सहित राजकीय अध्यापक संघ के विजय गोस्वामी, नरेश महाजन, अश्वनी गुलेरिया और अरुण कुमार मौजूद रहे।
फरवरी के बाद जमा नहीं किया ईपीएफ
आरोप लगाया कि कंपनी ने शिक्षकों का फरवरी 2016 के बाद से अभी तक करीब 20 लाख प्रतिमाह के हिसाब से ईपीएफ जमा नहीं करवाया है। कंपनी पर कानूनी कार्रवाई करने की योजना बनाई जा रही है।
वेतन बढ़ोतरी के नाम पर हेरफेर
शिक्षकों ने बताया कि नवंबर 2015 में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद कंप्यूटर शिक्षकों ने 42 दिन से जारी कक्षाओं का बहिष्कार समाप्त किया था। उनके वेतन में 15 फीसदी बढ़ोतरी के आदेश हुए थे। इसमें विभाग ने हेरफेर किया।
विभाग नवंबर 2015 से पहले सीनियर फैकल्टी आईटी को 9438 रुपये और बढ़ोतरी के बाद 9488 रुपये अदा कर रहा है। इसमें सेवा कर और 10 प्रतिशत कंपनी कमीशन भी शामिल है। ऐसे में शिक्षकों को पहले मिल रहे 6112 रुपये की बजाय 7044 रुपये निश्चित हुए, जो 15 फीसदी बढ़ोतरी नहीं है।