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निदेशालय, सचिवालय के बाहर गरजे कंप्यूटर शिक्षक

Tue, 19 Jul 2016 12:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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computer teacher
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उच्च शिक्षा निदेशालय और राज्य सचिवालय के बाहर कंप्यूटर शिक्षकों ने जमकर नारेबाजी की। उन्होंने राज्य सरकार से आउटसोर्सिंग पर तैनात कंप्यूटर शिक्षकों के लिए नीति बनाने और शिक्षा विभाग में मर्ज करने की मांग की। सुबह उच्च शिक्षा निदेशालय में एकत्र हुए कंप्यूटर शिक्षकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर मुख्यमंत्री को भ्रमित करने का आरोप लगाया।
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कहा, मुख्यमंत्री कई बार शिक्षकों के लिए पालिसी बनाने का आश्वासन दे चुके हैं, इसके बावजूद अधिकारी फाइल तैयार नहीं कर रहे। मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना की जा रही है। कंप्यूटर शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी राजेश शर्मा ने कहा कि कंप्यूटर शिक्षक 15

सालों से स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। अब नियमित करने से अफसर कतरा रहे हैं। कंप्यूटर शिक्षकों ने निदेशालय में प्रदर्शन करने के बाद ओल्ड बस स्टैंड शिमला से लेकर छोटा शिमला तक रैली निकाली। छोटा शिमला बस स्टॉप के पास दोबारा प्रदर्शन किया।
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कक्षाएं ठप, बच्चों से फिर भी वसूली जा रही फीस

उधर, कंप्यूटर शिक्षक संघ का 16वें दिन क्रमिक अनशन जारी रहा। रोहड़ू, चौपाल और कोटखाई के शिक्षक वीरेंद्र, तपिंद्र और संजय जस्टा क्रमिक अनशन पर बैठे। चार जुलाई से कंप्यूटर शिक्षक राज्य विधानसभा के पास स्थित वर्षा शालिका में क्रमिक अनशन पर बैठे हैं। संघ के सदस्यों ने कहा कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।

प्रदेश के 1100 से अधिक सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा बीते 18 दिनों से ठप है। निजी कंपनी को एक्सटेंशन नहीं मिलने के चलते कंप्यूटर शिक्षक स्कूलों में नहीं जा पा रहे हैं। नवीं से जमा दो कक्षा तक प्रदेश के स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा वैकल्पिक विषय के तौर पर दी जा रही है। कंप्यूटर की कक्षाएं ठप होने के बावजूद स्कूली बच्चों से 110 रुपये की फीस वसूली जा रही है।

अफसर नहीं दे रहे कोई संतोषजनक जवाब
सरकारी स्कूलों में ठप हुई कंप्यूटर शिक्षा और कंप्यूटर शिक्षकों के प्रदर्शन को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा पीसी धीमान और उच्च शिक्षा निदेशक दिनकर बुराथोकी इस मामले पर जवाब देने के बजाए मामले को जल्द हल करने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
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कंप्यूटर शिक्षकों के लिए नीति बनाएं मुख्यमंत्री: अनुराग

 सांसद एवं बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा है कि कंप्यूटर शिक्षकों की हड़ताल पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को स्वयं संज्ञान लेना चाहिए। हड़ताल से शिक्षकों के भविष्य का ही नहीं, बल्कि छात्रों की पढ़ाई का भी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को युवाओं के भविष्य की चिंता नहीं है।

नीति बनाकर इसका समाधान निकालना चाहिए। उनकी हठधर्मिता से शिक्षक और छात्र दोनों का नुकसान हो रहा है। अनुराग ने कहा कि राज्य का मुखिया होने के नाते राज्य के हर तबके की समस्या को हल करना उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन शिक्षकों की समस्या हल न करने से साफ  हो जाता है कि राज्य की जनता, कर्मचारियों की समस्या को लेकर वह गंभीर नहीं हैं।

ठाकुर ने कहा कि यह ऐसा मुद्दा नहीं है, जिसे इतना लंबा खींचना चाहिए। शिक्षकों की जो मांग है, उसके लिए आवश्यक नीति बनाने की जरूरत है। इससे न केवल, अभी बल्कि भविष्य की समस्या हल हो जाएगी। ठाकुर ने कहा कि इन कारणों के चलते हिमाचल प्रदेश देश के अन्य राज्यों से पिछड़ रहा है।
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