राज्य के हजारों फोरलेन प्रभावितों को बढ़ाकर मुआवजा देने का मामला फिलहाल लटक गया है। राज्य के फोरलेन प्रभावित उत्तराखंड की तर्ज पर किसानों को भूमि का चार गुणा मुआवजा देने के लिए संघर्ष समिति के सदस्य अड़े हुए हैं। दलील दी जा रही है कि हिमाचल के किसानों के पास छोटी काश्त है और ऐसी स्थिति में किसानों को अपनी अधिकांश कृषि भूमि से हाथ धोना पड़ रहा है। संघर्ष समिति के साथ दूसरे दौर की बैठक नवंबर दूसरे पखवाड़े में फिर बुलाई जानी है।
उल्लेखनीय है कि नवंबर पहले हफ्ते में राज्य सचिवालय में फोरलेन प्रभावितों की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें फोरलेन संघर्ष समिति के सदस्य भी आमंत्रित किए गए थे। अधिकारियों की दलील थी कि प्रदेश में फोरलेन प्रभावितों को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के फोरलेन प्रभावितों से अधिक भूमि मुआवजा दिया गया है। अफसरों के इस दलील से समिति सदस्य ज्यादा संतुष्ट नहीं हैं। फोरलेन प्रभावितों का कहना है कि हिमाचल में किसानों के पास जमीन के बडे़ रकबे नहीं हैं। ऐसी स्थिति में प्रभावितों के पास काफी कम जमीन रह जाएगी।
संघर्ष समिति यूथ विंग के अध्यक्ष धमेंद्र कहते हैं कि पहले दौर की बैठक में कोई हल नहीं निकल पाया है? अब समिति सदस्य दूसरे दौर की बैठक में दस्तावेजों और ठोस प्रमाण के साथ जाएंगे। बैठक से पहले दूसरे राज्यों में फोरलेन प्रभावितों को मिले मुआवजे की दरों को लेकर कागजात जुटाए जा रहे हैं। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां समान है। वहां के फोरलेन प्रभावितों से भी संपर्क किया जा रहा है।