हिमाचल के चंबा मेडिकल कॉलेज में तैनात आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतनमान को लेकर निजी कंपनी द्वारा कथित धोखाधड़ी सामने आई है। कंपनी की ओर से कर्मचारियों के लिए सरकार द्वारा तय वेतनमान न देकर मनमर्जी से भुगतान किया गया। वेतन का आधे से ज्यादा पैसा कंपनी खुद ही डकारती रही। इसका खुलासा आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा हासिल की गई आरटीआई की जानकारी से हुआ है।
मेडिकल कॉलेज आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ ने अब उच्च न्यायालय में जाने का फैसला लिया है। मेडिकल कॉलेज चंबा में दिन-रात विभिन्न जगहों पर 200 आउटसोर्स कर्मचारी तैनात रहते हैं। ऐसे में कंपनी प्रबंधन आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतनमान में धोखाधड़ी कर लाखों डकार चुकी है।
महासंघ के प्रधान जीआर वर्मा ने बताया कि तीन सालों से मेडिकल कॉलेज में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को 35 हजार, 30 हजार, 20 हजार व 15 हजार रुपये वेतन जारी होता रहा। लेकिन कंपनी कर्मचारियों को छह से दस हजार के बीच में वेतन देती रही। ईपीएफ व ईएसआई नंबर के साथ भी कंपनी द्वारा गड़बड़ी की गई है।
उधर, कंपनी प्रबंधक कृष्णा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य ने शिक्षा को दरकिनार करके ट्रेनिंग आधार पर आउटसोर्स कर्मचारियों को रखा था। उनकी योग्यता अनुसार कंपनी उन्हें पूरा वेतन भी देती रही। जब नए प्राचार्य ने वेतन में अंतर निकाला तो कंपनी से उसे भी रिकवरी के रूप में सरकार को जमा करवा दिया है। सरकार जो वेतन आउटसोर्स कर्मचारियों को दे रही है, वही वेतन कर्मचारियों के खाते में डाला जा रहा है। कंपनी पर लगाए आरोप निराधार हैं।