राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला भारत के लोगों के कला-कौशल, प्रतिभा और उद्यमशीलता के प्रदर्शन का एक स्थापित मंच बन गया है। यह मेला विलुप्त हो रही हस्तशिल्प और हथकरघा की विशेष कला-विधाओं को संरक्षित करने, बढ़ावा देने और कारीगरों को उनके काम को प्रदर्शित करने का उचित मंच प्रदान कर रहा है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत त्योहारों और मेलों का देश है। इस मेले में शिल्पकारों और हथकरघा कारीगरों के अलावा विविध अंचलों के पहनावे, लोक-कलाओं, व्यंजनों, संगीत और लोक-नृत्यों का भी संगम होता है। इस मेले में भारत के गांवों की खुशबू और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक के विविध रंग, यहां आने वालों को हमेशा आकर्षित करते रहेंगे।