प्रदेश के टीचर्स को अब कॉलेजों में पढ़ाने-लिखाने पर खास ध्यान देना होगा।
हिमाचल सरकार ने कॉलेज प्रिंसिपल और प्रोफेसरों की इन्क्रीमेंट को उनके काम और रिजल्ट से जोड़ दिया है।
प्रधान सचिव शिक्षा ने 14 मार्च को जारी अधिसूचना में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत राज्य के करीब 80 डिग्री कॉलेजों के लिए नए मापदंड जारी किए थे।
इसमें व्यवस्था थी कि टीचर अब हर हफ्ते 16 के बजाय 26 घंटे पढ़ाएंगे।
अधिसूचना में किया गया संशोधन
क्लास का सेक्शन 60 के बजाय 80 से 100 स्टूडेंट्स का होगा। मेजर और माइनर विषयों को कितने घंटे देने हैं?
ये शेडयूल भी नया होगा। अब वीरवार को इस अधिसूचना में संशोधन जारी कर एक और शर्त जोड़ दी गई।
इसमें व्यवस्था की गई है कि अगर इन मापदंडों का पालन नहीं किया गया तो कॉलेज प्रिंसिपल और टीचर्स की इन्क्रीमेंट प्रभावित होगी।
शिक्षकों के काम को उनकी कक्षा के रिजल्ट से आंका जाएगा। अगर रिजल्ट ठीक नहीं होगा तो उन्हें वेतनवृद्धि का लाभ भी नहीं मिलेगा।
राज्य में इस समय कालेज कैडर में कुल 2200 पद हैं। इनमें से करीब 400 अभी खाली चल रहे हैं।
कॉलेज टीचर्स ने आत्मघाती कदम बताया
राजकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष डा. आरके कायस्था ने बताया कि संघ ने 14 मार्च को जारी मापदंडों का विरोध किया था।
इसके बाद अब संशोधन के जरिये अधिसूचना में नई शर्त जोड़ना आत्मघाती कदम हैं।
टीचर के काम पर प्रिंसिपल की इन्क्रीमेंट रोकने के पीछे क्या तर्क है?
संघ मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और शिक्षा सचिव से मसला उठाएगा।