प्रदेश बागवानी महकमे के शीर्ष अधिकारियों में चल रहे शीत युद्ध का असर बागवानी अधिकारियों पर पड़ रहा है। बागवानों के हितों के काम करने के बजाय अधिकारी एक-दूसरे की टांग खींचने में ज्यादा जुटे हुए हैं।
इससे बागवानी से जुड़ी कई योजनाएं सिरे नहीं चढ़ पा रही हैं। विभिन्न योजनाओं के लिए बागवानों को देय सब्सिडी तक को सालों से रोका गया है।
एक अफसर केंद्र से कोई स्कीम लेकर आता है तो दूसरा उसमें रोड़े फंसा देता है। रोड़े ही नहीं, इन अधिकारियों ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से एक-दूसरे के खिलाफ कई अनियमितताओं के मामलों तक को उठाया है।
विजिलेंस ब्यूरो तक को मामले भेजे गए हैं। इनमें से एक वरिष्ठ अधिकारी मंत्री के पसंदीदा हैं तो दूसरे विभाग में तैनात अधिकारी खुद को सीएम कार्यालय का नजदीकी बताकर वहां तरह-तरह का फीडबैक दे रहे हैं।
लंबे अरसे से दोनों एक-दूसरे को हटवाने का अभियान छेड़े हुए हैं। इनमें से एक आईएएस अधिकारी है तो दूसरे को डेपुटेशन पर विभाग में लाया गया है।
प्रतिनियुक्ति पर लाए अफसर को हटाने के लिए स्टोक्स ने लिखा पत्र
हिमाचल के बागवानी महकमे में प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त इस अफसर को हटाने के लिए बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को पत्र भी लिखा है। स्टोक्स ने इस अधिकारी को तत्काल हटाने को कहा है।
स्टोक्स ने इसकी खुद पुष्टि की। उन्होंने कहा कि उन्होंने यहां तक कह दिया है कि अगर इस अधिकारी से ज्यादा लगाव है तो इसे किसी दूसरी बढ़िया जगह पर ही नियुक्त कर दिया जाए।
स्टोक्स ने इस बात पर नाराजगी भी जताई है कि इसी अधिकारी के हस्तक्षेप से उन्हें विश्वास में लिए बगैर उनके एक पसंदीदा अफसर को सरकार ने बागवानी महकमे से बदला। बाद में उन्होंने सीएम से नाराजगी जताई तो इस अधिकारी की बहाली की गई।