मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि उन्हें पढ़ाई का बहुत शौक था और राजनीति में शामिल होने की उनकी कोई इच्छा नहीं थी। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनने की इच्छा रखते थे। यदि लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें इंदिरा गांधी और जवाहर लाल नेहरू से न मिलाया होता तो वह राजनेता न होते। कहा कि जब वे इंदिरा गांधी और पंडित नेहरू से मिले तो उन्हें कहा गया कि उन्हें महासू क्षेत्र से टिकट दिया जा रहा है। उन्होंने इस बात को हमेशा गोपनीय रखा, मगर एक दिन सभी को हैरानी हुई जब उन्हें महासू लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किया गया।
उस दिन से वे अच्छे और बुरे दौर में कांग्रेस के साथ हैं। जब तक जीवित हैं, तब तक कांग्रेस के साथ रहेंगे। मुख्यमंत्री से राष्ट्रीय आकलन एवं प्रत्यायन परिसर (नैक) दल ने गत सायं बुधवार को भेंट की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे इस बात से सहमत हैं कि विद्यार्थी नेताओं को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, मगर यह मेरिट के आधार पर होना चाहिए। वे सेंट स्टीफन महाविद्यालय दिल्ली के छात्र रहे हैं और उन्होंने कभी भी छात्र राजनीति में भाग नहीं लिया।
हालांकि, वहां मेरिट के आधार पर निर्वाचित छात्र कार्यकारिणी होती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों को राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। हालांकि, वे लोक सभा और विधानसभा चुनाव में वोट के लिए स्वतंत्र है, परंतु वे राजनीति के उपदेशक नहीं हैं और न ही उन्हें शिक्षण संस्थानों में कोई राजनीतिक कार्यालय चलाने चाहिए। मुख्य सचिव वीसी फारका, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार टीजी नेगी, प्रो वाइस चांसलर आरएस चौहान, पंजीयक पंकज ललित, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक आरएस नेगी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस मौके पर उपस्थित थे।