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शिक्षकों को लेकर सीएम वीरभद्र सिंह का बड़ा बयान

Sat, 18 Oct 2014 06:29 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला,शिमला
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि कॉलेज शिक्षक शिमला और शहरों में रहने का मोह छोड़कर दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में सेवाएं देने के लिए स्वेच्छा से आगे आएं। प्रदेश के हर कोने में आज बिजली और पानी समेत सारी सुविधाएं हैं।
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शिक्षक सिर्फ आकेएमवी, कोटशेरा और संजौली में नौकरी का मोह त्याग दें। मुख्यमंत्री संजौली कॉलेज में आयोजित एचपीयू के ग्रुप थ्री यूथ फेस्टिवल के समापन समारोह में संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि कॉलेजों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। सिर्फ शैक्षणिक माहौल बने और छात्र अनुशासन में रहना सीखें। उन्होंने मेरिट आधार पर मनोनीत एससीए पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारी संभालने पर बधाई भी दी। कहा कि ये मेरिट होल्डर छात्र अन्य छात्रों के लिए रोल मॉडल साबित होंगे।
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उन्होंने कहा कि फीस बढ़ोतरी पर कुछ दल हल्ला कर माहौल खराब कर रहे हैं। यह राजनीति सिर्फ विश्वविद्यालय तक सीमित है। बाहर वे एक सीट तक नहीं जीत सकते।

विश्वविद्यालय ने जो थोड़ी-बहुत फीस बढ़ाई है, उसकी समीक्षा के लिए सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है। कहा कि कमेटी जो भी सिफारिश करेगी, सरकार उसे मानेगी।

विवि ने रूसा के लागू किए जाने पर परीक्षाएं अधिक होने के कारण सिर्फ परीक्षा की फीस बढ़ाई है। हॉस्टल और ट्यूशन फीस नहीं बढ़ाई। इसलिए शोर मचाना गलत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने खास तौर पर लड़कियों को घर-द्वार कॉलेज शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए 14 नए कॉलेज खोले हैं। प्रदेश सरकार स्नातक तक की छात्राओं की पढ़ाई पर कोई फीस नहीं ले रही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 में संजौली कॉलेज को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा उनकी सरकार के कार्यकाल में दिया था। इसी तर्ज पर प्रदेश के अन्य भागों में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कॉलेज खोले जाएंगे। यहां प्रवेश का आधार मेरिट होगा और यहां के बच्चे दूसरों से अलग होंगे।
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