मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में शिक्षकों की नियुक्ति के परिणाम रोकने को जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक नियुक्त किए जाने थे, वे सही प्रक्रिया से चुने जा रहे थे। वे समझते हैं कि इस पर रोक लगाने से पहले विचार करने की जरूरत थी।
वीरभद्र सिंह ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान रिज मैदान पर पत्रकारों से अनौपचारिक बात की। मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी राज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य का नाम लिए बगैर की। शपथ ग्रहण समारोह के दो दिन बाद ही राज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य ने प्रदेश विश्वविद्यालय में वर्ष 2015 में हुई 11 शिक्षकों की भर्ती के परिणाम पर रोक लगाई है।
भर्ती प्रक्रिया की पात्रता पर सवाल उठने के बाद लिए गए इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय की ओर से विज्ञापित कुल 200 पदों की भर्ती प्रक्रिया पर भी ब्रेक लग गई है। अब राजभवन शिमला के आगामी आदेशों के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी। शुक्रवार को ईसी की बैठक शुरू होने से पहले राजभवन ने विवि प्रबंधन को आदेश दिए कि शिक्षक भर्ती का परिणाम घोषित न किया जाए।
साथ ही राजभवन ने वर्ष 2012 में 37 पदों के लिए और 2015 में सहायक आचार्य के 11 पदों के लिए रखी गई पात्रता शर्तों और अपनाई गई भर्ती प्रक्रिया का ब्योरा तलब किया है। उल्लेखनीय है कि शपथ ग्रहण समारोह के दौरान नेता प्रतिपक्ष धूमल ने भर्ती प्रक्रिया की पात्रता पर सवाल उठाते हुए रोक लगाने की मांग की थी।