अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की हिमाचल इकाई के आह्वान पर शिमला में आयोजित आक्रोश रैली को लेकर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जमकर हमला किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में लागू रूसा प्रणाली से सिर्फ उन शिक्षकों और विद्यार्थियों को परेशानी थी जिन्हें मेहनत से दिक्कत है।
कहा कि पहले शिक्षकों को पढ़ाना कम पड़ता था अब ज्यादा पढ़ाना पड़ रहा है। इसी तरह विद्यार्थियों को भी पहले की अपेक्षा अब ज्यादा पढ़ना पड़ रहा है। यही वजह है कि वह विरोध कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश ही नहीं बल्कि देश दुनिया की नामचीन शैक्षणिक संस्थाओं में भी सेमेस्टर व्यवस्था लागू की गई है।
इससे पहले उन्होंने नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल के इस रैली में करीब 25 से 30 हजार युवाओं के शामिल होने की बात पर भी कटाक्ष किया। कहा कि हिमाचल के बनने के बाद भी हुई रैली में इतने लोग नहीं आए थे। सीएम ने कहा कि अगर इतने लोग आते तो रिज से लेकर रेलवे स्टेशन तक युवाओं की कतार खत्म न होती।
इससे पहले सीएम की गैर मौजूदगी में धूमल ने एबीवीपी के कार्यक्रम और उनकी मांगों से सदन को अवगत कराया था। कहा कि बिना तैयारी के रूसा प्रणाली को लागू करने की वजह से विवि के विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कहा कि रूसा के मानक के अनुसार न तो एचपीयू में प्रोफेसर हैं और न ही तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर।
युवाओं को नौकरी देने के बजाय टायर्ड और रिटायर्ड लोगों को एक्सटेंशन दिया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने प्राइवेट संस्थानों द्वारा की जा रही फीस की मनमानी वसूली पर भी सदन का ध्यान आकर्षित किया। धूमल ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है
कि निजी शैक्षिणक संस्थानों पर नियंत्रण के लिए बने रेगुलेटरी कमीशन को चहेतों के एडजस्टमेंट का स्थान बनाने के बजाय शिक्षाविदों के हवाले करना चाहिए। धूमल ने कहा कि इसके अलावा भी कार्यकर्ताओं की 30 मांगें हैं जिनपर सरकार को ध्यान देते हुए काम करना चाहिए।