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ABVP की राज्य स्तरीय आक्रोश रैली में गरजे राष्ट्रीय महामंत्री

Fri, 31 Mar 2017 08:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राज्य स्तरीय आक्रोश रैली में हजारों छात्र और कार्यकर्ता जुटे। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय महामंत्री विनय विंद्रे थे। उन्होंने कहा कि एबीवीपी सत्ता परिवर्तन में विश्वास न कर सामाजिक और व्यवस्था परिवर्तन में विश्वास करती है। यदि हालात न सुधरे तो एबीवीपी सत्ता परिवर्तन का भी दम रखती है।
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नेताओं ने सरकार की शिक्षा नीतियों और छात्र विरोधी फैसलों पर भी प्रहार किया। विंद्रे ने कहा कि एबीवीपी रूसा की विरोधी नहीं है। रूसा में सीबीसीएस सेमेस्टर सिस्टम का विरोध कर रही है। इस सिस्टम के लिए जो सुविधाएं चाहिए वे हैं ही नहीं। प्रदेश के 114 कॉलेजों में 1500 से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं। जबकि इस सिस्टम में छात्र शिक्षक अनुपात 20:1 होना चाहिए। ऐसे में नए सिस्टम के तहत पढ़ रहे लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है।

यह नया सिस्टम अव्यवहारिक और अनसाइंटिफिक है। सरकार इसके लिए मूलभूत और ढांचागत सुविधाएं मुहैया नहीं करवा पाई है। एमपी में सेमेस्टर सिस्टम बंद कर दिया गया है।  उन्होंने कहा कि बिना शिक्षक कैसी शिक्षा। प्रदेश में छात्राओं के छात्रावास तक नहीं है। उन्होंने सरकार पर फीस बढ़ाने, रूसा सिस्टम लागू करने, छात्र संघ चुनावों पर रोक लगाकर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने जैसे कई आरोप लगाए।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार में अलग से शिक्षा मंत्री तक नहीं है जिससे सरकार की शिक्षा के प्रति गंभीरता साफ नजर आती है। उन्होंने सरकार से सस्ती, सुलभ और गुणात्मक शिक्षा सुविधा देने की मांग उठाई। वहीं विनय ने प्रदेश में बैकडोर से शिक्षा विभाग में भर्तियां करने, बरोजगारी भत्ते के नाम पर युवाओं से धोखा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आज प्रदेश में करीब 16 लाख बेरोजगार हैं। सरकार उन्हें रोजगार के अवसर देने में नाकाम रही है। उन्होंने निजी शिक्षण संस्थानों की चल रही लूट को रोकने को सख्त नियामक आयोग स्थापित करने की मांग की।

नेताओं ने चेताया मांगें न मानीं तो और उग्र होगा आंदोलन 
रैली को राष्ट्रीय संगठन मंत्री, श्रीनिवास, उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री नवीन शर्मा, प्रांत संगठन मंत्री कौल नेगी और एबीवीपी की हिमाचल प्रदेश प्रांत मंत्री हेमा ठाकुर ने भी संबोधित किया। उन्होंने प्रदेश सरकार को चेताया कि एबीवीपी की यह आक्रोश रैली

चार सालों में सरकार की शिक्षा को नजरअंदाज करने की नीतियों और युवा बेरोजगारों से धोखा करने के खिलाफ पनपा गुस्सा है, जो आने वाले समय में और उग्र होगा। यदि नीतियों में सुधार न हुए, बढ़ाई गई सौ से 1500 गुणा फीस कम न की गई, शिक्षा में उनकी मांगों के मुताबिक सुधार न हुए तो यह आंदोलन और उग्र होगा। जिसका असर आगामी चुनाव पर भी पड़ सकता है। 

देश भर के लिये प्रेरणा बनेगा यह छात्र युवा आंदोलन- सुनील आंबेकर 
आक्रोश रैली में आए एबीवीपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील अंवेकर ने कहा कि आक्रोश रैली पूरे देश भर के युवाओं के लिए एक प्रेरणा साबित होगी। कैसे एक छोटे से प्रदेश में हजारों युवा बदलाव और अपनी मांगें पूरी करने के लिए एकजुट हुए हैं।

हालात न सुधरे तो सरकार को सत्ता से बाहर भी होना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के आगे दुनिया मान रही है कि देश आगे बढ़ रहा है। यह इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि देश के हर नागरिक ने राष्ट्रहित में सोचना आरंभ किया है। लेकिन कुछ ताकतें देश को तोड़ने के काम में लगी हुई हैं जिनका हर जगह भंडाफोड़ हो रहा है।

अबेंकर ने कहा कि हिमाचल के लोग बच्चों को बेहतर शिक्षा देने में पूरी तरह सक्षम हैं लेकिन प्रदेश सरकार की फीस बढ़ोतरी, रूसा सिस्टम शिक्षा का निजीकरण, आधारभूत ढांचे का भाव आदि ऐसी कई परिस्थितियां हैं जो छात्रों को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर रही हैं।

छात्र और जन सहयोग से आयोजित की गई रैली  
रैली में उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री नवीन शर्मा ने रैली में आए खर्च पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें चर्चा के मुताबिक एक करोड़ का खर्च हुआ है, मगर इसे छात्रों कार्यकर्ताओं ने एक-एक घर और कैंपस में चंदे के रूप में एकत्र किया है। चेतन

गुलेरिया ने निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी और लूट को उजागर किया। वहीं आरकेएमवी की छात्रा नेत्री अंकिता ने प्रदेश व राजधानी के कॉलेजों में छात्रावासों की कमी हर जिला में महिला कॉलेज खोले जाने और छात्राओं को मुफ्त यात्रा सुविधा दिए जाने की मांग उठाई।

एबीवीपी का दस हजार फूड पैकेट बांटने का दावा 
आक्रोश रैली में हजारों कार्यकर्ताओं को संगठन की ओर से घरों से पैक कर पहुंचाएं गए फूड पैकेट अलग- अलग स्थानों पर उपलब्ध करवाए गए। प्रदेश के निचले क्षेत्रों से आए कार्यकर्ता और छात्रों को घणाहट्टी में, सिरमौर और सोलन से आए छात्रों को शोघी, ऊपरी शिमला, किन्नौर के छात्रों को चलौंठी में भोजन की व्यवस्था की गई थी। एबीवीपी का दावा है कि दस हजार पैकेट बांटे गए। 

कार्यकर्ताओं ने ट्रैफिक संचालन में किया सहयोग 
रैली से ट्रैफि क बाधित न हो, इसके लिए पुलिस अधिकारी और दर्जनों के हिसाब से जवान ट्रैफिक और कानून व्यवस्था की ड्यूटी में लगे थे। इसमें मदद के लिए एबीवीपी ने अलग से कार्यकर्ता तैनात किए थे। जिन्होंने पुलिस का सहयोग किया। छात्रों की संख्या को देखते हुए विद्यार्थी परिषद के 150 कार्यकर्ताओं ने यातायात सुचारु करने में जिम्मेदारी निभाई। 

कार्ट रोड, स्कैंडल प्वाइंट से गुजरी रैली 
एबीवीपी की आक्रोश रैली चौड़ा मैदान से शुरू हुई। जहां से विधानसभा चौक- विक्ट्री टनल, विंटर फिल्ड, सेंट थॉमस  होते हुए शाही सिनेमा और वहां से लोकल बस स्टैंड होते हुए आईस स्केटिंग रिंक पहुंची।

इन मुद्दों पर सरकार को घेरा 
स्तानक स्तर पर रूसा सीबीसीएस सेमेस्टर सिस्टम बंद करने, फीस बढ़ोतरी वापस लेने, शिक्षा का निजीकरण, व्यापारीकरण बंद करना, छात्र संघ चुनाव की बहाली, केंद्रीय विश्वविद्यालय भूमि चयन पर राजनीति बंद करना, कॉलेजों में मूलभूत ढांचागत सुविधाएं देना, एसएमसी, पीटीए तथा आउटसोर्स की नियुक्तियों बंद करना, निजी बीएड कॉलेजों में शिक्षकों का

शोषण बंद करना, निजी शिक्षण संस्थान रेगुलेटरी कमीशन के अध्यक्ष पर शिक्षाविद की तैनाती, राजनीतिक आधार पर शिक्षक तबादले बंद करना, जेबीटी, टेट आधार पर नियुक्ति न कर बैचवाइज भर्ती करना, सेवानिवृत्त शिक्षकों को पुन: रोजगार

की प्रथा बंद करना, शिक्षण संस्थानों में नशा माफिया पर रोक लगाना, शिक्षा पर जीडीपी का छह फीसदी और बजट का दस फीसदी बजट खर्च करना, प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक के पाठ्यक्रम में बदलाव करने, निजी स्कूलों की फीस और वर्दी, किताबों की खरीद में मनमानी पर नियंत्रण को नियामक आयोग का गठन करने की मांग इस दौरान की गई।
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