प्रदेश में 50 साल की उम्र के बाद अब कर्मचारियों और अधिकारियों को स्टडी लीव नहीं मिलेंगी। इसके लिए सरकार अधिकतम आयु सीमा तय करने जा रही है। केवल 50 साल से कम उम्र वाले सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को इस तरह का अवकाश मिलेगा। यह जानकारी मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान दी।
ज्वालामुखी के कांग्रेस विधायक संजय रतन ने प्रश्नकाल के दौरान सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री ये बताएंगे कि सरकार में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी सरकारी सेवा में रहते हुए कितनी आयु तक स्टडी लीव पर जाने के लिए पात्र हैं। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों-कर्मचारियों की उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए कोई भी आयु सीमा निर्धारित नहीं है।
नियमों में संशोधन करेगी सरकार
रतन ने इसी पर अनुपूरक सवाल किया कि 55 साल की उम्र में भी प्रदेश के कई सरकारी अधिकारी और कर्मचारी स्टडी लीव पर जा रहे हैं। न तो वे विभाग को कुछ योगदान देते हैं और न ही इस उम्र में स्टडी लीव पर जाने का कोई मतलब है। अवांछित जगहों पर तबादलों से बचने के लिए भी कई अधिकारी और कर्मचारी ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने सीएम से आग्रह किया कि इतनी उम्र के बाद सरकार उन्हें स्टडी लीव के लिए स्पांसर न करे।
वे स्टडी लीव पर होने के समय सरकार से वेतन भी लेते हैं। ऐसी बेमतलब छुट्टियों पर रोक लगाई जानी चाहिए। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्टडी लीव पर जाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बनाए गए नियमों में संशोधन करेगी। 50 साल की उम्र के बाद किसी को भी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अवकाश नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे वे सहमत हैं।
हिमाचल मंत्रिमंडल की बैठक आज- हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक शुक्रवार को राज्य विधानसभा के परिसर में बुलाई गई है। ये बैठक प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही के पूरा होने के बाद होगी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में होने जा रही इस
बैठक में टीसीपी संशोधन विधेयक पर भी चर्चा हो सकती है। इसमें अवैध भवनों को नियमित करने के लिए नई रिटेंशन पालिसी लाने पर भी सरकार निर्णय ले सकती है। कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी हो सकते हैं।
ठेकेदारों को दो से ज्यादा ठेके नहीं दिए जाएंगे: वीरभद्र
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि ठेकेदारों को सरकारी काम के दो से अधिक ठेके नहीं दिए जाएंगे। सरकार ने आदेश दिए हैं कि किसी भी ठेकेदार को दो से अधिक कामों के टेंडर न दिए जाएं। यदि लोक निर्माण विभाग और सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग ने किसी को दो से अधिक ठेके दिए हैं तो ऐसे मामले रोके जाएंगे। ठेकेदारों को दो से ज्यादा ठेके दिए जाएं तो वे इन्हें सबलेट करते हैं।
इससे काम की गुणवत्ता पर विपरीत असर पड़ता है। आगे से ठेके सबलेट भी नहीं होंगे। मुख्यमंत्री विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विधायक महेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह रवि और विक्रम सिंह के संयुक्त सवाल का जवाब दे रहे थे। सीएम ने कहा कि नाबार्ड के तहत 31 दिसंबर, 2012 से पूर्व स्वीकृत कार्यों में से 566 कार्य अधूरे हैं।
सवालों को क्लब नहीं किया जाना चाहिए
इनमें 357 कार्य लोक निर्माण विभाग और 209 आईपीएच विभाग के हैं। इस अवधि के 25 कार्य शुरू नहीं किए गए हैं। इनमें 20 पीडब्ल्यूडी और 5 आईपीएच विभाग के हैं। एक जनवरी, 2013 से 31 जनवरी, 2016 तक 493 योजनाओं को नाबार्ड से बजट मंजूर किया गया। इसमें 262 सड़कें-पुल, 91 लघु सिंचाई, 136 ग्रामीण पेयजल और चार अन्य योजनाएं हैं। इनमें 206 योजनाओं का काम शुरू हो चुका है। 287 स्कीमों का काम औपचारिकताएं पूरा करने के बाद शुरू होगा।
वर्ष 2007-08 से 31 दिसंबर, 2012 तक 1092 विधायक प्राथमिकताओं के कार्यों को 2080 करोड़ की धनराशि मंजूर की गई। लोनिवि में 17 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। 357 अधूरे हैं और 20 में काम शुरू नहीं हुआ है। आईपीएच विभाग में 285 का पूर्ण हो चुके हैं, 209 अधूरे हैं तथा 5 कार्यों में काम शुरू नहीं हुआ है।
मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायकों के सवालों को विधानसभा सचिवालय की ओर से इकट्ठा करने के मामले में कहा कि इन्हें क्लब नहीं किया जाना चाहिए। कहा कि विधानसभा सचिवालय में तीन विधायकों के सवाल क्लब किए गए हैं। इससे इनका ठीक से जवाब देने में दिक्कत हो रही है। इससे पूर्व भाजपा विधायक रविंद्र सिंह रवि ने कहा कि भाजपा के तीनों विधायकों ने अलग-अलग सवाल पूछे थे, मगर इन्हें विधानसभा सचिवालय ने क्लब कर दिया है।