मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे संपत्ति संबंधी मामले के सह आरोपी आनंद चौहान ने अपने भतीजे सौरभ चौहान के माध्यम से उनके केस की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश के कोर्ट से मामले को स्थानांतरित कर किसी और जज की अदालत में भेजने की गुहार लगाई है।
इसके लिए सौरभ चौहान ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। इसकी प्रतिलिपि प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र को भी भेजी गई, जिसे सोमवार को मुख्यमंत्री ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेज दिया है।
गौरतलब है कि संपत्ति मामले में आठ जुलाई 2016 को आनंद चौहान को ईडी ने गिरफ्तार किया था। वर्तमान में वह तिहाड़ जेल में बंद है। इस मामले की अगली सुनवाई छह जनवरी 2017 को प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने फारवर्ड की गई रीप्रेजेंटेशन के साथ आग्रह किया है कि उन्हें आनंद चौहान की ओर से उनके भतीजे सौरभ चौहान के सीजेआई को भेजे पत्र की प्रति मिली है।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी सीजेआई और दिल्ली हाई कोर्ट को फॉरवर्ड की इसकी प्रति
सीएम वीरभद्र सिंह ने साथ भेजे अपने पत्र में स्पष्ट किया कि वे वर्तमान में हिमाचल के मुख्यमंत्री हैं और छठी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने कहा कि वे सोसाइटी में अपनी पोजिशन का ध्यान रखते हुए संयम रखे हुए थे, मगर जब सह आरोपी ने इन परिस्थितियों में अन्याय के खिलाफ उनकी चुप्पी को चुनौती दी है तो ऐसी स्थिति में वे आग्रह करते हैं कि इस मामले पर किसी अन्य न्यायाधीश द्वारा निर्णय किया जाए।
इससे किसी को कोई संदेह नहीं होगा। इस संबंध में किसी असुविधा के लिए वे क्षमाप्रार्थी हैं। बताते चलें कि तिहाड़ जेल में बंद आरोपी आनंद चौहान ने सीजेआई और दिल्ली हाईकोर्ट के सीजे को लिखे अपने तीन पेज के पत्र में सत्रह बिंदुओं में अपनी बात विस्तार से कही है।
इसमें उक्त न्यायाधीश को बदलने के कारण भी गिनाए गए हैं। सीएम वीरभद्र सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने आनंद चौहान से मिली रीप्रेजेंटेशन की प्रति को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को फॉरवर्ड किया है।
ईडी ने हाईकोर्ट में कहा, जांच बिल्कुल सही
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह सहित अन्य के खिलाफ मनी लांड्रिंग मामले की जांच को उचित ठहराया है। ईडी ने हिमाचल प्रदेश सरकार के जांच को गैरकानूनी ठहराने संबंधी तर्क पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राज्य सरकार किंग (मुख्यमंत्री) के प्रति वफादार होती है और किंग, राज्य सरकार के प्रति।
दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विपिन सांघी के समक्ष ईडी का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले में दर्ज दो प्रारंभिक जांच (पीई) में अंतर थे। व्यापक जांच में काफी अतिरिक्त साक्ष्य मिले, जिनके आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद पीई स्वयं ही खत्म हो जाती है।
उन्होंने कहा ईडी के पास सभी आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य हैं, जिससे पता चलता है कि इन सभी ने मनी लांड्रिंग अधिनियम का उल्लंघन किया है।उन्होंने राज्य सरकार द्वारा बिना उनकी इजाजत के जांच शुरू करने संबंधी सीबीआई व ईडी के अधिकार क्षेत्र को गलत बताया।
कहा- राज्य सरकार किंग के प्रति वफादार
उन्होंने कहा राज्य सरकार जांच को गैरकानूनी ठहरा रही है और उनका तर्क है कि मामले की जांच राज्य सरकार करने में सक्षम है। अधिवक्ता ने कहा राज्य सरकार किंग के प्रति वफादार होती है। ऐसे में वे किस आधार पर निष्पक्ष जांच कर सकते हैं। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय व हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए जांच को सही ठहराया।
राज्य सरकार के अधिवक्ता ने हाल ही में तर्क रखा था कि बिना राज्य सरकार की मंजूरी लिए सीबीआई संबधित राज्य में हुए अपराध पर जांच नहीं कर सकती। अधिवक्ता ने विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा था कि सीबीआई कैसे कह सकती है कि राज्य सरकार
ठीक ढंग से जांच नहीं कर सकती। वह बताए कि जांच ऐसे प्रभावित हो सकती है। किसी भी राज्य के मामले में दूसरे राज्य की पुलिस जाकर बिना राज्य पुलिस की मंजूरी से काम नहीं कर सकती। इस मामले में मंगलवार को भी जिरह जारी रहेगी।