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हिमाचल सरकार ने फिर बनाई मैच से दूरी

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क्रिकेट की पिच पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और एचपीसीए के बीच सियासी रिश्तों में एक बार फिर से मिठास घुलते-घुलते रह गई। धर्मशाला में इस बार भी मुख्यमंत्री सहित उनकी कैबिनेट और तमाम कांग्रेस नेताओं ने क्रिकेट मैच से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। हालांकि, इस बार एचपीसीए से विवाद से नहीं, बल्कि सीबीआई की छापामारी कारण बनी। 27 जनवरी 2013 को धर्मशाला स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत वीरभद्र सिंह और प्रेम कुमार धूमल के बीच मधुरता के रिश्ते घुलने से हुई थी।
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उस वक्त एचपीसीए अध्यक्ष अनुराग ठाकुर के निमंत्रण पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पूरी कैबिनेट के साथ भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाला एक दिवसीय मैच का लुत्फ उठाने पहुंचे थे। उनके साथ कांग्रेस के भी अधिकतर नेता पहुंचे थे। स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड के झंडों के साथ हरी टोपियां भी दिख रही थीं।

तब लगा था, बदलने लगे हैं राजनीति के मायने

तब ऐसा लगने लगा था कि हिमाचल की सियासत में अब राजनीति के मायने बदलने लगे हैं, लेकिन इसके बाद एचपीसीए पर कांग्रेस चार्जशीट के आधार पर एक के बाद एक विजिलेंस केस बनने लगे और क्रिकेट की पिच पर रिश्तों में घुली मिठास फिर से कड़वाहट में तबदील होने लगी। धर्मशाला को फिर 17 अक्तूबर 2014 को भारत और वेस्ट इंडीज के बीच दूसरे वन डे की मेजबानी का मौका मिला।

एचपीसीए ने फिर मुख्यमंत्री को फिर मैच का न्योता दिया, लेकिन मुख्यमंत्री और पूरी कैबिनेट ने मैच से दूरी बना ली थी। अब दो अक्तूबर को एचपीसीए को पहले अंतरराष्ट्रीय टी 20 मैच की मेजबानी करने का मौका मिला। बाकायदा एचपीसीए ने सीएम और कैबिनेट को मैच देखने का न्योता भेजा जिसे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मंजूर भी कर लिया था।
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इस बयान पर बिगड़ी बात

सीएम ने एलान किया कि सरकार मैच के दौरान सुरक्षा खर्च नहीं लेगी। लेकिन, मैच से चंद रोज पहले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के घर पर सीबीआई रेड पड़ गई। मुख्यमंत्री ने इसे केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और सांसद अनुराग ठाकुर का सियासी षड्यंत्र बताने के साथ क्रिकेट मैच में शामिल होने से भी इनकार कर दिया।

बीसीसीआई के सचिव अनुराग ठाकुर ने अपने बयान में कहा था कि धर्मशाला में आयोजित मैच में प्रदेश के मुख्यमंत्री को बुलाया गया है न की वीरभद्र सिंह को। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह इस बात को लेकर नाराज हैं। कांग्रेस के कार्यकर्ता ने भी अनुराग ठाकुर के इस बयान की निंदा की थी। कहा था कि अनुराग ठाकुर को इस तरह का बयानबाजी करना शोभा नहीं देता है।
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