नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल को उनके विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य उपकेंद्र अमनेड़ के भवन के एक उद्घाटन समारोह में नहीं बुलाने पर हिमाचल प्रदेश सूचना आयोग के फैसले पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने तल्ख टिप्पणी की।
आयोग ने धूमल को एक उद्घाटन में नहीं बुलाने पर अफसरों को तलब किया है। इस मामले पर शनिवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से पूछा गया तो वे बोले कि आयोग के इस मामले में उलझने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि ये फैसला उचित नहीं है।
राज्य सूचना आयुक्त केडी बातिश की अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में टिप्पणी की कि आरटीआई एक्ट का उद्देश्य सरकार के कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही को तय करना है। सार्वजनिक गतिविधि के दौरान पब्लिक अथॉरिटी को पक्षपातपूर्ण तरीके से काम नहीं करना चाहिए।
लोकतंत्र से मतलब जनता की सरकार जनता की ओर से जनता के लिए है। लोकतंत्र चुने हुए प्रतिनिधियों की गैर हाजिरी में काम नहीं करता है। अगर प्रशासन ने क्षेत्र के स्थानीय प्रतिनिधि को जानबूझकर इग्नोर किया है तो ये एक गंभीर मामला है।
आयोग ने बीएमओ भोरंज और सीएमओ हमीरपुर 24 फरवरी को पूरे रिकॉर्ड के साथ आयोग के समक्ष उपस्थित हों। उनसे हेल्थ सब सेंटर अमनेड़ का पूरा रिकॉर्ड भी लाने को कहा है।