बेशक मुख्य सूचना आयुक्त के खाली पद के लिए हिमाचल सरकार ने अन्य नौकरियों की तरह आवेदन मंगवाए हों, मगर आखिर में प्रदेश की राजनीति के दोनों दिग्गजों मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल की चर्चा के बाद ही एक नाम तय होगा। राज्य सरकार को इस पद के लिए 146 आवेदन मिले हैं।
इन तमाम नामों और आवेदनों वाली फाइल मुख्य सचिव के दफ्तर पहुंच चुकी है। यहां छंटनी के बाद मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और एक कैबिनेट मंत्री की तीन सदस्यीय कमेटी किसी एक नाम पर मुहर लगाएगी। इस पद की दौड़ में कई आईएएस, आईपीएस और सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं।
मुख्य सचिव वीसी फारका ने बताया कि कुल 146 आवेदन मिले हैं। पहले छंटनी होगी और उसके बाद मुख्यमंत्री, एक कैबिनेट मंत्री और नेता प्रतिपक्ष किसी योग्य व्यक्ति को मुख्य सूचना आयुक्त चुनेंगे। उल्लेखनीय है कि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त भीम सेन के 24 मार्च 2016 को सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद खाली हुआ है। प्रशासनिक सुधार विभाग ने इस पद के लिए विज्ञापन जारी कर एक तय प्रारूप पर 22 जून तक आवेदन मांगे थे।
ये चर्चित लोग भी आवेदकों में शुमार
राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष केएस तोमर, राज्य सूचना आयुक्त केडी बातिश, आईएएस अधिकारी मोहन चौहान, पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक ठाकुर, पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. पीसी कपूर, सीआईडी के एडीजीपी बीएनएस नेगी, पूर्व पुलिस अधीक्षक बलबीर ठाकुर, पूर्व सीजेएम ऊना राजेंद्र कुमार शर्मा और सेना प्रशिक्षण कमान शिमला के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल संजीव मधोक जैसे दिग्गज शामिल हैं।
एक आवेदन यूएसए से डॉ. सुब्रत कुमार का भी है। मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग के सचिव टी. राधाकृष्णन और आरटीआई कार्यकर्ता देव आशीष भट्टाचार्य जैसे चर्चित लोग भी आवेदकों में शुमार हैं। पंजाब, केरल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, नई दिल्ली से भी कई आवेदन पहुंचे हैं। आवेदकों में न केवल प्रतिष्ठित लोग शामिल हैं बल्कि बेरोजगारों की भी लंबी सूची है।
ये मिलती हैं सुविधाएं
मुख्य सूचना आयुक्त का स्टेटस सुप्रीम कोर्ट के जज के बराबर माना जाता है। लगभग दो लाख रुपये के मासिक वेतन और भत्ते मिलते हैं। साल में तीन बार भारत के किसी भी हिस्से की सैर कर सकते हैं। इस पद पर पांच साल के लिए नियुक्ति होती है या इस पद पर 65 साल की उम्र पूरा होने तक बना रहा जा सकता है।
Published by Arvind Thakur