ब्यास बेसिन में 131 में से 68 क्रशरों के अवैध तौर पर संचालन के खुलासे के बाद सरकार ने क्रशर संचालकों पर शिकंजा कस दिया है। स्टोन क्रशरों से फैक्टर 7 के स्थान पर फैक्टर 5 के तहत रॉयल्टी वसूली जाएगी। सरकार का तर्क है कि आधुनिक मशीनों से कम बिजली खपत में अधिक उत्पादन हो रहा है, जबकि सरकार को रॉयल्टी कम चुकाई जा रही है। साल 2002 में स्टोन क्रशर उद्योग में इस्तेमाल हो रही पुरानी तकनीक के आधार पर सरकार ने फैक्टर 7 के तहत रॉयल्टी वसूली का नियम तय किया था।
यानी एक टन ग्रिट/बजरी के उत्पादन के लिए बिजली की खपत पर फैक्टर 7 लगता था। अब सरकार रॉयल्टी की गणना बिजली की खपत के साथ अन्य तरीकों के आधार पर करेगी। मौजूदा समय में स्टोन क्रशरों में उपयोग हो रही नई तकनीक और आधुनिक मशीनरी के उपयोग से कम बिजली खपत में अधिक उत्पादन के चलते पुनर्विचार करने के बाद एक मीट्रिक टन ग्रिट/बजरी के उत्पादन के लिए फैक्टर 7 को फैक्टर 5 कर दिया गया है।