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Union Budget: सुक्खू बोले- केंद्र सरकार का वार्षिक बजट मात्र छलावा, विशेष ग्रांट नहीं मिलने से निराशा

Wed, 01 Feb 2023 08:08 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने  कहा कि केंद्र सरकार चाहती तो कम से कम हिमाचल को विशेष ग्रांट दे सकती थी। वर्तमान सरकार को पूर्व सरकार से 75 हजार करोड़ का कर्ज विरासत में मिला है। कर्मचारियों और पेंशनरों की 11 हजार करोड़ की देनदारी बकाया है। 
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि बजट 2023-24 में हिमाचल प्रदेश के विकास के लिए कुछ भी नहीं है। हिमाचल में रेल और राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार के लिए कोई प्रावधान नहीं है। आयकर दरों में किया बदलाव पर्याप्त नहीं है। आम जनता को इससे और ज्यादा छूट की उम्मीद थी। यह बजट केवल समृद्ध लोगों के पक्ष में है। महंगाई से परेशान मध्यम वर्ग को निराशा हुई है। कर्ज के बोझ से जूझ रहे राज्यों के लिए बजट में कोई विशेष छूट नहीं है। हिमाचल ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्य भी कर्ज के बोझ से जूझ रहे हैं। इनमें पंजाब, दिल्ली और मध्य प्रदेश हैं। सुक्खू ने कहा कि केंद्र सरकार चाहती तो कम से कम हिमाचल को विशेष ग्रांट दे सकती थी। वर्तमान सरकार को पूर्व सरकार से 75 हजार करोड़ का कर्ज विरासत में मिला है। कर्मचारियों और पेंशनरों की 11 हजार करोड़ की देनदारी बकाया है। बजट में छोटे पहाड़ी राज्यों के लिए जून 2022 से समाप्त जीएसटी प्रतिपूर्ति को फिर से शुरू करने के लिए कुछ नहीं कहा गया है। इसकी राज्य के लोगों को काफी उम्मीदें थीं। न ही बजट में किसी अन्य माध्यम से वित्तपोषण की बात कही गई है। यह बजट हिमाचल के लिए निराशाजनक रहा है।

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उन्होेंने कहा कि पर्यटन और स्वास्थ्य प्रदेश की प्राथमिकताएं हैं। वे हैरान हैं कि पूर्व भाजपा सरकार ने नवंबर में केंद्रीय वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर प्रस्ताव तैयार किया था। इस पर डबल इंजन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। यह बजट मात्र पानी के बुलबुले के समान क्षणभंगुर है। कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से संसद में प्रस्तुत वार्षिक बजट 2023-24 निराशाजनक और आम जनता की आशाओं के विपरीत है। यह बजट मात्र आंकड़ों का मायाजाल है। इसमें समाज के सभी वर्गों विशेषकर मध्यम वर्ग, गरीब, युवा और किसानों के लिए कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश की जनता को आज भी केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2024 में होने वाले आम चुनाव से पूर्व ‘अच्छे दिनों’ के वायदे के पूर्ण होने का इंतजार है। किसानों के लिए ऋण सीमा में वृद्धि के अलावा कुछ नहीं है। इससे केवल किसानों पर ऋण की देनदारी का बोझ बढ़ेगा। कहा कि बजट में किसानों के लिए खेती के उपकरणों और खाद में उपदान की कोई घोषणा नहीं है। मनरेगा में भी कोई अतिरिक्त प्रावधान नहीं किया गया है। इससे साबित होता है कि इस बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार को पूर्णतया नजरअंदाज किया गया है।

केंद्रीय बजट 2023-24 का आम जनविरोधी : माकपा

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने केंद्रीय बजट 2023- 24 को जनविरोधी करार दिया है। यह देश की आज की वास्तविक परिस्थिति के बिलकुल विपरीत है। इससे आम जनता को कोई राहत नहीं मिलेगी। आज देश की अर्थव्यवस्था की विकास दर में गिरावट आई है और वैश्विक मंदी की आशंका के चलते प्रभावित हुई है। माकपा राज्य सचिव ओंकार शाद और सचिवालय सदस्य संजय चौहान ने कहा कि इस परिस्थिति में बजट में जानता के मुख्य मुद्दे जैसे बेरोजगारी, महंगाई और कृषि संकट के समाधान पर बल देना चाहिए था। दूसरी ओर, अमीर और कॉरपोरेट को और अधिक टैक्स में छूट दी जा रही है। इससे अमीर और अमीर और गरीब और गरीब हो रहे हैं। आम जनता की रोजी रोटी पर और संकट बढ़ेगा। मनरेगा के लिए बजट मे 33 प्रतिशत, खाद्य सब्सिडी में 90,000 करोड़ रुपये की कटौती, खाद की सब्सिडी में 50000 करोड़ की कटौती की है। प्रधानमंत्री किसान निधि को भी 68,000 करोड़ से घटा कर 60,000 करोड़ रुपये कर दिया है।

केंद्र का बजट निराशाजनक, मोदी कर रहे हिमाचल की अनदेखी : मल्ली

 प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव पुनित मल्ली ने केंद्र भाजपा सरकार के बजट को निराशाजनक बनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल प्रदेश को अपना दूसरा घर बताते हैं, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी केंद्र की बजट से हिमाचल को कुछ नही मिला है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में न तो उद्योग क्षेत्र को लेकर बात की गई है और न ही रेल लाइन के विस्तार को लेकर कुछ दिया है। उन्होंने कहा कि आठ वर्षों से केंद्रीय बजट में देश के किसान, मजदूर, युवा, बेरोजगार, महिलाओं और आम जनता को कुछ नहीं मिला, राहत केवल चंद पूंजीपति काॅरपोरेट मित्रों पर केंद्रित रही है।

उन्होंने कहा मोदी सरकार जनकल्याण की योजनाओं के बजट आवंटन में लगातार कटौती कर रही है। अमीरों से लिया जाने वाला वेल्थ टैक्स खत्म कर डीजल पर लगभग 10 गुना सेंट्रल एक्साइज बढ़ाना महंगाई का सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि 2014 में जो गैस सिलिंडर 410 रुपये का था, आज वह 1,150 रुपये के पार है। पेट्रोल के दाम 70 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 100 रुपये प्रति लीटर के पार हो गए हैं। डीजल के दाम 55 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 90 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गए हैं। तेल और दाल की कीमत 70 रुपये और 60 रुपये प्रति किलो थी, वह आज 200 रुपये प्रति किलो को पार कर गई है। 
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केंद्रीय बजट दिशाहीन और रोजगार विरोधी : नरेश चौहान

मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से बुधवार को लोकसभा में प्रस्तुत बजट को दिशाहीन और रोजगार विरोधी बजट करार दिया है। उन्होंने कहा कि चुनावी वर्ष को देखते हुए केंद्र सरकार से उम्मीद की जा रही थी कि युवाओं और बेरोजगारों के लिए रोजगारपरक नीति की घोषणा होती, लेकिन इस बजट ने हर वर्ग को निराश किया है। मीडिया सलाहकार ने कहा कि वास्तव में महंगाई और बेरोजगारी से आम आदमी त्रस्त है और बजट में इस दिशा में कोई विशेष प्रयास नहीं किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी कीमतों में ठहराव आया है। महिलाओं के लिए इस बजट में कोई योजना नहीं हैं। किसानों, बागवानों और आम आदमी को कोई राहत प्रदान नहीं की गई है। हिमाचल की आर्थिकी पर्यटन विकास पर आधारित है, लेकिन केंद्रीय बजट में पर्यटन विकास के लिए कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि टैक्स दरों में भी लोगों को उलझाने का प्रयास किया गया है, जबकि बचत को प्रोत्साहित करने की बजाय खर्चों को बढ़ा दिया गया है।
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