मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने केंद्रीय बजट 2023- 24 को जनविरोधी करार दिया है। यह देश की आज की वास्तविक परिस्थिति के बिलकुल विपरीत है। इससे आम जनता को कोई राहत नहीं मिलेगी। आज देश की अर्थव्यवस्था की विकास दर में गिरावट आई है और वैश्विक मंदी की आशंका के चलते प्रभावित हुई है। माकपा राज्य सचिव ओंकार शाद और सचिवालय सदस्य संजय चौहान ने कहा कि इस परिस्थिति में बजट में जानता के मुख्य मुद्दे जैसे बेरोजगारी, महंगाई और कृषि संकट के समाधान पर बल देना चाहिए था। दूसरी ओर, अमीर और कॉरपोरेट को और अधिक टैक्स में छूट दी जा रही है। इससे अमीर और अमीर और गरीब और गरीब हो रहे हैं। आम जनता की रोजी रोटी पर और संकट बढ़ेगा। मनरेगा के लिए बजट मे 33 प्रतिशत, खाद्य सब्सिडी में 90,000 करोड़ रुपये की कटौती, खाद की सब्सिडी में 50000 करोड़ की कटौती की है। प्रधानमंत्री किसान निधि को भी 68,000 करोड़ से घटा कर 60,000 करोड़ रुपये कर दिया है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव पुनित मल्ली ने केंद्र भाजपा सरकार के बजट को निराशाजनक बनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल प्रदेश को अपना दूसरा घर बताते हैं, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी केंद्र की बजट से हिमाचल को कुछ नही मिला है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में न तो उद्योग क्षेत्र को लेकर बात की गई है और न ही रेल लाइन के विस्तार को लेकर कुछ दिया है। उन्होंने कहा कि आठ वर्षों से केंद्रीय बजट में देश के किसान, मजदूर, युवा, बेरोजगार, महिलाओं और आम जनता को कुछ नहीं मिला, राहत केवल चंद पूंजीपति काॅरपोरेट मित्रों पर केंद्रित रही है।
उन्होंने कहा मोदी सरकार जनकल्याण की योजनाओं के बजट आवंटन में लगातार कटौती कर रही है। अमीरों से लिया जाने वाला वेल्थ टैक्स खत्म कर डीजल पर लगभग 10 गुना सेंट्रल एक्साइज बढ़ाना महंगाई का सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि 2014 में जो गैस सिलिंडर 410 रुपये का था, आज वह 1,150 रुपये के पार है। पेट्रोल के दाम 70 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 100 रुपये प्रति लीटर के पार हो गए हैं। डीजल के दाम 55 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 90 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गए हैं। तेल और दाल की कीमत 70 रुपये और 60 रुपये प्रति किलो थी, वह आज 200 रुपये प्रति किलो को पार कर गई है।
मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से बुधवार को लोकसभा में प्रस्तुत बजट को दिशाहीन और रोजगार विरोधी बजट करार दिया है। उन्होंने कहा कि चुनावी वर्ष को देखते हुए केंद्र सरकार से उम्मीद की जा रही थी कि युवाओं और बेरोजगारों के लिए रोजगारपरक नीति की घोषणा होती, लेकिन इस बजट ने हर वर्ग को निराश किया है। मीडिया सलाहकार ने कहा कि वास्तव में महंगाई और बेरोजगारी से आम आदमी त्रस्त है और बजट में इस दिशा में कोई विशेष प्रयास नहीं किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी कीमतों में ठहराव आया है। महिलाओं के लिए इस बजट में कोई योजना नहीं हैं। किसानों, बागवानों और आम आदमी को कोई राहत प्रदान नहीं की गई है। हिमाचल की आर्थिकी पर्यटन विकास पर आधारित है, लेकिन केंद्रीय बजट में पर्यटन विकास के लिए कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि टैक्स दरों में भी लोगों को उलझाने का प्रयास किया गया है, जबकि बचत को प्रोत्साहित करने की बजाय खर्चों को बढ़ा दिया गया है।