मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के बाद भुट्टो अपने क्रशर और ठेकेदारी से जुड़े कार्यों को लेकर लगातार दबाव बनाते रहे लेकिन 14 महीने तक वह उनसे कोई भी बेईमानी नहीं करवा पाए तो उन्होंने रास्ता बदल लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब निजी स्वार्थ पूरे नहीं हुए तो लोकतंत्र की मंडी में उनकी बोली लग गई और उन्होंने जनता के भरोसे के साथ विश्वासघात किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास सबसे बड़ा होता है और जो नेता इस विश्वास को तोड़ते हैं, उन्हें जनता कभी माफ नहीं करती।इस दौरान मुख्यमंत्री ने कुटलैहड़ के विधायक विवेक शर्मा की सराहना करते हुए कहा कि वह एक ईमानदार और जमीनी नेता हैं, जो लगातार क्षेत्र की समस्याओं को सरकार के समक्ष रखते रहते हैं।