औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दो एमओयू हुए
इस अवसर पर मैसर्स डाबर इंडिया लिमिटेड और मैसर्स करण सिंह वैद्य सोलन के साथ राज्य में औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दो मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) भी हस्ताक्षरित किए गए। पहले एमओए के तहत डाबर इंडिया लिमिटेड प्रदेश के किसानों को प्रतिवर्ष 12 लाख गुणवत्तापूर्ण पौधे (प्रति किस्म के एक लाख) और दस वर्षों में कुल 1.20 करोड़ पौधे (प्रति प्रजाति 10 लाख) उनकी पारिस्थितिकीय अनुकूलता के अनुसार उपलब्ध करवाएगी। निम्न व मध्य पहाड़ी क्षेत्रों के लिए आंवला, हरड़, बहेड़ा, काकड़ासिंगी और लोधर जैसी प्रजातियों के पौधे ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर जिलों और निचले शिमला क्षेत्र में वितरित किए जाएंगे।
मध्य से उच्च पहाड़ी क्षेत्रों में ये पाैधे वितरित किए जाएंगे
मध्य से उच्च पहाड़ी क्षेत्रों के लिए जटामांसी, कुटकी, सुगंधबाला (जड़ी-बूटियां), पदम काष्ठ (वृक्ष) और पुष्करमूल (जड़ी) के पौधे कुल्लू, चंबा, मंडी, ऊपरी शिमला और किन्नौर जिलों में वितरित किए जाएंगे। अल्पाइन प्रजातियां जैसे अतीस और विष (जड़ी-बूटियां) किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों को उपलब्ध करवाई जाएगी। दूसरा एमओए मैसर्स करण सिंह वैद्य सोलन के साथ पांच वर्षों की अवधि के लिए हस्ताक्षरित किया गया है, जिसके अंतर्गत सोलन जिला में चयनित औषधीय पौधों की खेती, संरक्षण और मूल्य श्रृंखला विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इस समझौते के तहत छह प्राथमिकता वाली प्रजातियों की खेती की जाएगी। इनमें हल्दी , अश्वगंधा, शतावरी, तुलसी, चिरायता और हिमालयन जेंटियन शामिल हैं। इसमें आसपास की पंचायतों को शामिल किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में 108 बीघा से अधिक भूमि पर कम से कम 225 महिला किसानों को शामिल किया जाएगा।
सरकार हिमाचल को देश का पहला हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध: सीएम
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को देश का पहला हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता प्रदान कर राज्य के स्वच्छ पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए कई पहलें की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भी बढ़ावा दे रही है। इस वर्ष अप्रैल तक एचआरटीसी के बेड़े में लगभग 300 नई ई-बसें शामिल की जाएंगी। विभिन्न सरकारी विभागों में इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन सुनिश्चित किया जा रहा है और 38,000 टैक्सियों को ई-टैक्सी में परिवर्तित करने के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार और हरीश जनारथा, सचिव (पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन) एसके. सिंगला, यूएनईपी क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन की सचिवालय प्रमुख डॉ. डर्वुड जैल्के, मार्टिना ओटो, डायरेक्टर इंडिया प्रोग्राम आईजीएसडी जेरिन ओशो, निदेशक डीसी राणा तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।