मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में तकनीक की अहम भूमिका है। सरकार पुलिस को हाईटेक उपकरण, आधुनिक वाहन, डिजिटल सर्विलांस सिस्टम और एडवांस कम्युनिकेशन टूल्स उपलब्ध करवा रही है, ताकि अपराध पर तुरंत और प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से लैस वाहनों से न सिर्फ चिट्टे की तस्करी पर लगाम लगेगी, बल्कि पुलिस की पेट्रोलिंग, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता भी मजबूत होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिट्टा बेचकर बनाई अवैध संपत्तियों के समूल नाश के आदेश दिए गए हैं और नशा तस्करों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट और पिट-एनडीपीएस जैसे सख्त कानूनों के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने बड़े ड्रग नेटवर्क तोड़े हैं और करोड़ों की अवैध संपत्ति भी जब्त की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार पुलिस कार्रवाई से अब पंजाब से सटे हिमाचल प्रदेश के बॉर्डर क्षेत्रों में चिट्टे की खपत में कमी दर्ज की गई है। यौन अपराधों की जांच की ट्रैकिंग प्रणाली के तहत मामलों में 93 प्रतिशत से अधिक अनुपालन दर दर्ज की गई है। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) ज्ञानेश्वर सिंह के अलावा अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष के दौरान विभाग में 274 कांस्टेबल, 98 इंस्पेक्टर, 225 सब इंस्पेक्टर और 225 असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर पदोन्नत हुए हैं। इसके अलावा अन्य कैडर में 95 कर्मियों को पदोन्नति मिली और ड्राइवर कैडर में भी 31 पदोन्नतियां की गईं। इससे न केवल पुलिस बल का मनोबल बढ़ा है, बल्कि नेतृत्व और कार्य क्षमता, दोनों और मजबूत हुई हैं। उन्होंने कहा कि सीसीटीएनएस के तहत हिमाचल प्रदेश ने पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा आईसीजेएस में भी राज्य ने अपनी श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया है। यौन अपराधों की जांच की निगरानी प्रणाली आईटीएसएसओ में अनुपालना दर 93 प्रतिशत से अधिक रही है। यह उपलब्धियां इंगित कर रही हैं कि हिमाचल पुलिस लगातार आधुनिक सक्षम और परिणामोन्मुख बन रही है। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।