उन्होंने कहा कि दूध की दरों में वृद्धि के बाद मिल्कफेड की दैनिक दूध खरीद 1,40,000 लीटर से बढ़कर 2,10,000 लीटर हो गई है। उन्नत दूध प्रसंस्करण संयंत्र प्रतिदिन 1.50 लाख लीटर दूध का प्रसंस्करण करेगा, जिससे दही, लस्सी, मक्खन, घी, पनीर, फ्लेवर्ड मिल्क, खोया और मोजरेला पनीर सहित विभिन्न प्रकार के डेयरी उत्पाद तैयार होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि शिमला जिले के दत्तनगर में दूध प्रसंस्करण संयंत्र की क्षमता 25.67 करोड़ रुपये की लागत से 20,000 लीटर से बढ़ाकर 70,000 लीटर प्रतिदिन की गई है। इस बढ़ी हुई क्षमता से शिमला, कुल्लू, मंडी और किन्नौर जिलों के डेयरी किसानों को लाभ मिल रहा है और 271 डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े लगभग 20,000 किसान इसका लाभ उठा रहे हैं।
सुक्खू ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना वर्तमान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ग्रामीणों के हाथों में अधिक पैसा पहुंचाने के लिए सरकार ने गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 32 रुपये से बढ़ाकर 45 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का 47 रुपये से बढ़ाकर 55 रुपये प्रति लीटर किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पिछले दो वर्षों से हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर और देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक बनाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहली बार है कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से उत्पादित 4,000 मीट्रिक टन मक्का 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया है और अगले सीजन से गेहूं 40 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने 2018-19 में 40 रुपये प्रति किलोग्राम की ऐतिहासिक वृद्धि की है। इस अवसर पर कृषि मंत्री चंद्र कुमार, राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया, उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक सुदर्शन बबलू व आशीष बुटेल, मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार गोकुल बुटेल, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष राम चंद्र पठानिया, पूर्व सांसद विप्लव ठाकुर, पूर्व विधायक सुरेंद्र काकू, एपीएमसी अध्यक्ष निशु मोंगरा, कांग्रेस नेता देवेंद्र सिंह व कर्ण पठानिया, एनडीडीबी के अध्यक्ष मिनेश शाह, नगर निगम धर्मशाला की महापौर नीना शर्मा, सचिव रितेश चौहान, हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड के प्रबंध निदेशक विकास सूद सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।