मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू।
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नई भर्ती में डॉक्टरों के नॉन प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) बंद किए जाने के मामले में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जो चिकित्सक हड़ताल पर गए हैं, उनका एनपीए बंद नहीं हुआ है। प्रदेश में यह पहली बार हुआ है कि जिन्हें एनपीए मिल रहा है, वे ही हड़ताल पर जा रहे हैं। एनपीए बंद नहीं, विदड्रा किया गया है। उन्होंने कहा कि भर्ती की मांग कर रहे डेंटल डॉक्टरों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में बेरोजगार डेंटल डॉक्टरों की संख्या तीन हजार के करीब है। प्रतिनिधिमंडल ने उनसे कहा कि बेरोजगार डॉक्टरों को सरकारी रोजगार चाहिए, एनपीए की जरूरत नहीं है। फिर यह मामला भी ध्यान में आया कि एलोपैथी, आयुर्वेद, वेटरनेरी डाॅक्टरों को एनपीए मिलता है। एक नियम के तहत इसमें बदलाव किया गया है। इसी कड़ी में कैबिनेट ने डेंटल डॉक्टरों के 38 पद स्वीकृत किए हैं। उन्होंने कहा कि डाॅक्टरों को हड़ताल पर जाने से पहले उनसे बात करनी चाहिए थी। जब आगे डाॅक्टरों के पद भरे जाएंगे तो उस समय एसोसिएशन उनसे बात करे। उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने डाॅक्टरों से नियमित सेवाएं देने की बात कही है।
डाॅक्टरों ने मंत्री हर्षवर्द्धन के साथ की बैठक, अभी जारी रहेगी हड़ताल
मेडिकल अधिकारियों की एसोसिएशन की उद्योग मंत्री हर्षवर्द्धन चौहान के साथ बैठक हुई। बैठक में डॉक्टरों के एनपीए से जुड़े मामले पर विस्तृत चर्चा की गई। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजेश राणा ने बताया कि कैबिनेट मंत्री के साथ एनपीए को बंद किए जाने के मामले में बातचीत हुई है। उन्होंने मामला मुख्यमंत्री के समक्ष रखने की बात कही। उधर, एसोसिएशन ने इस मामले में आगामी निर्णय और रणनीति को लेकर बैठक कर रणनीति बनाई है। वहीं, एनपीए के मुद्दे पर प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों की सांकेतिक पेन डाउन स्ट्राइक (हड़ताल) मंगलवार को भी जारी रही। मरीजों को सुबह के वक्त डेढ़ घंटा इलाज नहीं मिला। अस्पतालों में भारी भीड़ उमड़ी रही। दूरदराज क्षेत्रों से पहुंचे मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा। कई ऑपरेशन भी टाल दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि मांग पूरी होने तक डॉक्टर अभी हड़ताल को जारी रखेंगे।