मंडी जिले में स्वास्थ्य क्षेत्र में ड्रोन की सेवाएं बेहतर तरीके से लागू करने के बाद अब पूरे प्रदेश में ड्रोन से सेवाएं लेने के लिए प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया है। इसके लिए अब वीटॉल ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा जो कि लंबी दूरी की उड़ानें भरने में सक्षम है। यह करीब 300 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में कारगर है। यह ड्रोन आने वाले एक सप्ताह के भीतर मंडी से कुल्लू, हमीरपुर और शिमला के रामपुर तक स्वास्थ्य क्षेत्र में वैक्सीन, दवाइयां, खून के सैंपल और टेस्ट रिपोर्ट सहित अन्य सामग्री के आदान-प्रदान करने में प्रयोग किया जाएगा।
इसके लिए स्वास्थ्य विभाग मंडी ने सभी तैयारियों को पूरा कर लिया है। क्योंकि हिमाचल प्रदेश को ड्रोन टेक्नोलॉजी का विभिन्न कार्यों व विभाग में प्रयोग करने का पूरे देश में श्रेय है, ऐसे में जिला मंडी से ही स्वास्थ्य क्षेत्र में ड्रोन के प्रयोग को सफलता मिली है। मंडी को ही इस प्रोजेक्ट का पूरा कार्यभार मिला है। प्रोजेक्ट के संयोजक एवं कार्यक्रम अधिकारी डॉ. विशाल ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर अंतर जिला में ड्रोन का प्रयोग दवाइयां, सैंपल, टेस्ट रिपोर्ट सहित अन्य सामग्री लाने और ले जाने में किया जाएगा। वहीं, सीएमओ मंडी डॉ. देवेंद्र ने कहा कि जिला में ड्रोन का प्रयोग किया जा रहा है और इस प्रोजेक्ट को अब पूरे प्रदेश में शुरू किया जा रहा है। इससे मरीजों को बेहतर और कम समय में सेवाएं मिलेंगी।
अब तक तीन प्रकार के ड्रोन का हो चुका है प्रयोग
जिला मंडी में अब तक तीन प्रकार के ड्रोन का इस्तेमाल स्वास्थ्य विभाग कर चुका है। इसमें क्वार्ड कॉप्टर, हैक्जा कॉप्टर और ओक्टा कॉप्टर शामिल हैं। इन सभी ड्रोन का प्रयोग कम दूरी के लिए किया जा रहा था और इनमें बैटरी भी अधिक खर्च होती है। अब लंबी दूरी के लिए वीटॉल कॉप्टर का इस्तेमाल किया जाएगा। यह जमीन से तो एक ड्रोन की तरह उड़ान भरता है, मगर आसमान में यह प्लेन की तरह चलता है और लंबी दूरी तय करता है। बाद में यह लैंडिंग भी ड्रोन की तरह ही करेगा। इसमें बैटरी भी कम ही प्रयोग होती है।
मंडी के दुर्गम इलाकों में दी जा रहीं सेवाएं
बर्फबारी और बारिश के कारण मंडी जिला के कई दुर्गम इलाकों सराज, करसोग आदि में स्वास्थ्य सेवाएं मिलना कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में इन इलाकों में मंडी और नेरचौक मेडिकल कॉलेज से ड्रोन के जरिये सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। मरीजों को दूरदराज के अस्पतालों में जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।
नेशनल स्वास्थ्य मिशन का क्रस्ना लैब से करार
ड्रोन के माध्यम से अब टेस्ट के लिए खून के सैंपल लेना और रिपोर्ट देना भी सुगम हो गया है। क्रस्ना डायनोस्टिक लैब द्वारा नेशनल स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के साथ करार के बाद अब नेरचौक मेडिकल कॉलेज में स्थित लैब के हब तक मंडी और कुल्लू जिलों से टेस्ट के लिए खून के सैंपल ड्रोन के माध्यम से पहुंचाए जा रहे हैं। इससे टेस्ट रिपोर्ट मरीजों को तुरंत मिल रही है। लोगों को पहले तीसरे दिन रिपोर्ट मिलती थी।
खर्चों का मूल्यांकन करने में जुटी सरकार
कांग्रेस सरकार ड्रोन और अन्य संस्थानों से दवाइयों की सप्लाई किए जाने के खर्चों का मूल्यांकन करने में जुटी है। स्वास्थ्य विभाग का यह भी मानना है कि ड्रोन में चार किलो से ज्यादा दवाइयां और अन्य उपकरण नहीं भेजे जा सकते हैं। कम से कम आठ किलो की सप्लाई की जानी आवश्यक है। ऐसे में स्वास्थ्य और आईटी विभाग से भी इस बारे में विचार विमर्श किया जा रहा है। स्वास्थ्य सचिव एम सुधा ने बताया कि दुर्गम क्षेत्रों के लिए दवाओं और सैंपल भेजने के खर्चों का मूल्यांकन किया जा रहा है।